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परियोजना सलाहकार समिति को पुरस्कार किस बात का : सूरत नेगी
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किन्नौर का बजट क्यों हुआ आधा, जवाब दें मंत्री जगत सिंह नेगी
समिति की स्वीकृत, पूरी और लंबित योजनाओं का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर की प्रोजेक्ट एडवाइजरी कमेटी को देशभर के जनजातीय क्षेत्रों में प्रथम स्थान मिलने और पुरस्कार दिए जाने की खबर के बीच पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने प्रदेश सरकार और राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार का स्वागत है लेकिन इसके बहाने किन्नौर की जनता के वास्तविक सवालों को दबाया नहीं जा सकता। सूरत नेगी ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्राइबल सब प्लान के बेहतर क्रियान्वयन के लिए किन्नौर की परियोजना सलाहकार समिति को यह सम्मान मिला है। उन्होंने इसके लिए संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों को सराहनीय बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस समिति को पुरस्कार किस आधार पर मिला है। क्या किन्नौर के विकास बजट में कटौती करने के लिए भी कोई पुरस्कार दिया जा सकता है? उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का पुरस्कार मिलना किन्नौर के समग्र विकास का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जनजातीय जिला होने के कारण किन्नौर को विकास के लिए विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मंत्री जगत सिंह नेगी से मांग की कि पिछले वर्षों की तुलना में किन्नौर को ट्राइबल सब-प्लान और अन्य विकास मदों में कितनी धनराशि मिली है, इसका वर्षवार विवरण जनता के सामने रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी उपलब्धि का वास्तविक मूल्यांकन पुरस्कार से नहीं, बल्कि धरातल पर हुए विकास और जनता को मिले लाभ से होना चाहिए। यदि सरकार का दावा है कि किन्नौर के विकास के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया गया है तो उसे आंकड़ों के साथ जनता के सामने आने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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समिति की स्वीकृत, पूरी और लंबित योजनाओं का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)।
किन्नौर की प्रोजेक्ट एडवाइजरी कमेटी को देशभर के जनजातीय क्षेत्रों में प्रथम स्थान मिलने और पुरस्कार दिए जाने की खबर के बीच पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने प्रदेश सरकार और राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार का स्वागत है लेकिन इसके बहाने किन्नौर की जनता के वास्तविक सवालों को दबाया नहीं जा सकता। सूरत नेगी ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्राइबल सब प्लान के बेहतर क्रियान्वयन के लिए किन्नौर की परियोजना सलाहकार समिति को यह सम्मान मिला है। उन्होंने इसके लिए संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों को सराहनीय बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस समिति को पुरस्कार किस आधार पर मिला है। क्या किन्नौर के विकास बजट में कटौती करने के लिए भी कोई पुरस्कार दिया जा सकता है? उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का पुरस्कार मिलना किन्नौर के समग्र विकास का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जनजातीय जिला होने के कारण किन्नौर को विकास के लिए विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मंत्री जगत सिंह नेगी से मांग की कि पिछले वर्षों की तुलना में किन्नौर को ट्राइबल सब-प्लान और अन्य विकास मदों में कितनी धनराशि मिली है, इसका वर्षवार विवरण जनता के सामने रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी उपलब्धि का वास्तविक मूल्यांकन पुरस्कार से नहीं, बल्कि धरातल पर हुए विकास और जनता को मिले लाभ से होना चाहिए। यदि सरकार का दावा है कि किन्नौर के विकास के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया गया है तो उसे आंकड़ों के साथ जनता के सामने आने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।