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Rampur Bushahar News: रिवाड़ी के ठिरशू मेला में पारंपरिक गीतों पर झूमे ग्रामीण
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रिवाडी गांव में ठिरशू मेले में उपस्थित ग्रामीण और देवता साहिब। संवाद
आराध्य देवता जगेश्वर महादेव की उपस्थिति में किया नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। रिवाड़ी गांव में शनिवार को एक दिवसीय खौधार ठिरशू मेला धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। मेले में क्षेत्र के आराध्य देवता जगेश्वर महादेव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
देवता पूर्वाह्न करीब 11:00 बजे राम मंदिर रिवाड़ी पहुंचे, जहां गांववासियों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद राम मंदिर रिवाड़ी से देवता को नाचते-गाते हुए मेले स्थल खौधार तक ले जाया गया।
क्षेत्र के हिमादित्य पंचांग के रचयिता उमा शंकर और दीक्षित ने बताया कि खौधार ठिरशू मेला क्षेत्र का प्राचीन और ऐतिहासिक है। इसे हर वर्ष वैशाख मास की 4-5 प्रविष्टि को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि देवता महाराज का पहला सतराला और दूसरा सतराला ऋषि पंचमी मेला दलाश में आयोजित होता है।
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उन्होंने बताया कि ठिरशू मेला नए ऋतु के आगमन का प्रतीक है। मेले में ऋतु गीत, दशी, बिरशू दलांगी सहित अन्य पारंपरिक गीत गाए गए। पहले के समय में इसमें स्वांग नृत्य भी किया जाता था, जो लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। रिवाड़ी गांव में शनिवार को एक दिवसीय खौधार ठिरशू मेला धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। मेले में क्षेत्र के आराध्य देवता जगेश्वर महादेव मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
देवता पूर्वाह्न करीब 11:00 बजे राम मंदिर रिवाड़ी पहुंचे, जहां गांववासियों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद राम मंदिर रिवाड़ी से देवता को नाचते-गाते हुए मेले स्थल खौधार तक ले जाया गया।
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क्षेत्र के हिमादित्य पंचांग के रचयिता उमा शंकर और दीक्षित ने बताया कि खौधार ठिरशू मेला क्षेत्र का प्राचीन और ऐतिहासिक है। इसे हर वर्ष वैशाख मास की 4-5 प्रविष्टि को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि देवता महाराज का पहला सतराला और दूसरा सतराला ऋषि पंचमी मेला दलाश में आयोजित होता है।
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उन्होंने बताया कि ठिरशू मेला नए ऋतु के आगमन का प्रतीक है। मेले में ऋतु गीत, दशी, बिरशू दलांगी सहित अन्य पारंपरिक गीत गाए गए। पहले के समय में इसमें स्वांग नृत्य भी किया जाता था, जो लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता था।

रिवाडी गांव में ठिरशू मेले में उपस्थित ग्रामीण और देवता साहिब। संवाद