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Rampur Bushahar News: बाढ़ से बागीपुल हो गया बंजर, लोग भूल नहीं पा रहे तबाही का वो मंजर
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रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग की टीम के समेज में सर्वेक्षण करने के दौरान सामुहिक चित्र में। संवा
बाढ़ ने चंद मिनटों में बागीपुल को पिछड़ा और बंजर क्षेत्र बनाया
उस दृश्य की पीड़ा अभी भी सताती है रातभर, नहीं देती सोने
अब बागीपुल को उन्नति के शिखर तक पहुंचने में लगेंगे कई वर्ष
रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग की टीम के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बाढ़ के साथ आई त्रासदी के जख्म अब भी लोगों के दिलों में हरे हैं। ग्रामीण उस भयावह मंजर को नहीं भूल पा रहे हैं। 31 जुलाई की रात को बाढ़ ने बागीपुल को चंद मिनटों में तबाह कर दिया था, जिससे आज बागीपुल पिछड़ा और बंजर क्षेत्र बन गया है, वहीं उस भयावह मंजर की याद स्थानीय लोगों को रातभर सताती है और उसकी पीड़ाएं सोने नहीं देती हैं। उस त्रासदी के कारण आज बागीपुल ऐसी हालत में है कि फिर से उन्नति के शिखर तक पहुंचने में कई वर्ष लग जाएंगे। यह खुलासा रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग की टीम के सर्वेक्षण से हुआ।
रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने बाढ़ग्रस्त बागीपुल और केदस गांव का क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण प्रो. डॉ. जितेंद्र सानी के नेतृत्व में किया गया। महाविद्यालय के छात्रों ने केदस गांव के सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत की। लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि बाढ़ के कारण यहां जानमाल की कोई हानि नहीं हुई है, लेकिन एक घर, लोगों के खेत मलबे की चपेट में आए थे। इसके अलावा बागीपुल में बाढ़ आने के कारण पुराना पुल और सरकार की ओर से बनाया जा रहा नया पुल दोनों मलबे की चपेट में आ गए थे। सर्वेक्षण करते समय छात्रों ने स्थानीय लोगो से बातचीत की और बाढ़ आने से हुए नुकसान के बारे में चर्चा की।
टीम ने सवालों से जानी व्यथा
सर्वेक्षण टीम में शामिल छात्रों ने ग्रामीणों से सवाल पूछे कि उस रात को क्या हुआ, सरकार ने उन्हें क्या सुविधाएं दीं, जानमाल का कितना नुकसान हुआ, अब वह अपना गुजारा कैसे कर रहे हैं और यहां पर क्या सुविधाएं चाहते हैं। छात्रों को स्थानीय लोगों से पहले और अबके बागीपुल का पता चला। पहले जहां बागीपुल अपनी उन्नति के शिखर पर पहुंच गया था। वहीं, बाढ़ आने से चंद मिनटों के अंदर ही एक पिछड़ा और बंजर क्षेत्र बन गया, जिसे अब उन्नति के शिखर तक पहुंचने के लिए कई वर्ष लग जाएंगे। लोगों ने कहा कि बेशक सरकार उन्हें कुछ राहत प्रदान कर रही है, लेकिन उनका देखा हुआ उस रात का भयानक मंजर कभी नहीं भुलाया जाएगा और न ही वह कभी उसे भूल पाएंगे। उन्हें उस दृश्य की पीड़ाएं अब भी रात भर सताती है और सोने नहीं देती हैं।
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उस दृश्य की पीड़ा अभी भी सताती है रातभर, नहीं देती सोने
अब बागीपुल को उन्नति के शिखर तक पहुंचने में लगेंगे कई वर्ष
रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग की टीम के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बाढ़ के साथ आई त्रासदी के जख्म अब भी लोगों के दिलों में हरे हैं। ग्रामीण उस भयावह मंजर को नहीं भूल पा रहे हैं। 31 जुलाई की रात को बाढ़ ने बागीपुल को चंद मिनटों में तबाह कर दिया था, जिससे आज बागीपुल पिछड़ा और बंजर क्षेत्र बन गया है, वहीं उस भयावह मंजर की याद स्थानीय लोगों को रातभर सताती है और उसकी पीड़ाएं सोने नहीं देती हैं। उस त्रासदी के कारण आज बागीपुल ऐसी हालत में है कि फिर से उन्नति के शिखर तक पहुंचने में कई वर्ष लग जाएंगे। यह खुलासा रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग की टीम के सर्वेक्षण से हुआ।
रामपुर कॉलेज के भूगोल विभाग के तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने बाढ़ग्रस्त बागीपुल और केदस गांव का क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया। यह सर्वेक्षण प्रो. डॉ. जितेंद्र सानी के नेतृत्व में किया गया। महाविद्यालय के छात्रों ने केदस गांव के सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत की। लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि बाढ़ के कारण यहां जानमाल की कोई हानि नहीं हुई है, लेकिन एक घर, लोगों के खेत मलबे की चपेट में आए थे। इसके अलावा बागीपुल में बाढ़ आने के कारण पुराना पुल और सरकार की ओर से बनाया जा रहा नया पुल दोनों मलबे की चपेट में आ गए थे। सर्वेक्षण करते समय छात्रों ने स्थानीय लोगो से बातचीत की और बाढ़ आने से हुए नुकसान के बारे में चर्चा की।
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टीम ने सवालों से जानी व्यथा
सर्वेक्षण टीम में शामिल छात्रों ने ग्रामीणों से सवाल पूछे कि उस रात को क्या हुआ, सरकार ने उन्हें क्या सुविधाएं दीं, जानमाल का कितना नुकसान हुआ, अब वह अपना गुजारा कैसे कर रहे हैं और यहां पर क्या सुविधाएं चाहते हैं। छात्रों को स्थानीय लोगों से पहले और अबके बागीपुल का पता चला। पहले जहां बागीपुल अपनी उन्नति के शिखर पर पहुंच गया था। वहीं, बाढ़ आने से चंद मिनटों के अंदर ही एक पिछड़ा और बंजर क्षेत्र बन गया, जिसे अब उन्नति के शिखर तक पहुंचने के लिए कई वर्ष लग जाएंगे। लोगों ने कहा कि बेशक सरकार उन्हें कुछ राहत प्रदान कर रही है, लेकिन उनका देखा हुआ उस रात का भयानक मंजर कभी नहीं भुलाया जाएगा और न ही वह कभी उसे भूल पाएंगे। उन्हें उस दृश्य की पीड़ाएं अब भी रात भर सताती है और सोने नहीं देती हैं।
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