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Rampur Bushahar News: रेड गोल्डन सेब के गिरे दामों ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
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लागत भी नहीं निकल पा रही, मेहनत पर फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। एक तरफ बागवानी महंगी होती जा रही है, वहीं मंडियों में फसल के दाम गिरते जा रहे हैं। सेब उत्पादक बागवान इस बार रेड गोल्डन सेब की बिक्री को लेकर बेहद चिंतित हैं। जहां 10 दिन पहले तक मंडियों में रेड गोल्डन सेब के दाम 1,500 से 1,700 रुपये प्रति बॉक्स मिल रहे थे, वहीं अब गिरकर 600 से 1,000 रुपये तक पहुंच गए हैं। इससे बागवानों को अपनी सालभर की मेहनत और लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। बागवान बॉबी सावंत, तेज राम डोगरा, रमन और अरुण का कहना है कि रेड गोल्डन सेब की खेती में सालभर मेहनत की, लेकिन अब जब फसल बाजार में आई तो उम्मीदों के विपरीत दाम मिलने से आर्थिक झटका लगा है। बागवानों के अनुसार इस बार रेड गोल्डन सेब के पौधों को रोगों से बचाने के लिए दवाइयों, मजदूरी, ट्रे, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर अधिक खर्च हुआ है, लेकिन घाटा ही हाथ लग रहा है। हिमाचल की मंडियों में बागवान अपने सेब औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। बागवानों की मांग है कि सरकार और एपीएमसी को इस गिरावट को लेकर संज्ञान लेना चाहिए और सेब की खरीद में उचित दाम सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि सेब बागवानी को बचाया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। एक तरफ बागवानी महंगी होती जा रही है, वहीं मंडियों में फसल के दाम गिरते जा रहे हैं। सेब उत्पादक बागवान इस बार रेड गोल्डन सेब की बिक्री को लेकर बेहद चिंतित हैं। जहां 10 दिन पहले तक मंडियों में रेड गोल्डन सेब के दाम 1,500 से 1,700 रुपये प्रति बॉक्स मिल रहे थे, वहीं अब गिरकर 600 से 1,000 रुपये तक पहुंच गए हैं। इससे बागवानों को अपनी सालभर की मेहनत और लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। बागवान बॉबी सावंत, तेज राम डोगरा, रमन और अरुण का कहना है कि रेड गोल्डन सेब की खेती में सालभर मेहनत की, लेकिन अब जब फसल बाजार में आई तो उम्मीदों के विपरीत दाम मिलने से आर्थिक झटका लगा है। बागवानों के अनुसार इस बार रेड गोल्डन सेब के पौधों को रोगों से बचाने के लिए दवाइयों, मजदूरी, ट्रे, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर अधिक खर्च हुआ है, लेकिन घाटा ही हाथ लग रहा है। हिमाचल की मंडियों में बागवान अपने सेब औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। बागवानों की मांग है कि सरकार और एपीएमसी को इस गिरावट को लेकर संज्ञान लेना चाहिए और सेब की खरीद में उचित दाम सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि सेब बागवानी को बचाया जा सके।