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Rampur Bushahar News: कोटखाई के दस पशु औषधालय में लगे ताले
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कर्मचारियों के 11 पद वर्षों से पद खाली, जनता हो रही परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। उपमंडल में पशु चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल है। सरकार एक ओर पशु संवर्धन और संरक्षण के लिए योजनाएं बना रही है, वहीं दस औषधालय में लंबे समय से ताले लटके हुए हैं। क्षेत्र के पशुपालकों को टीकाकरण और पशुओं के उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। कोटखाई उपमंडल के विभिन्न पशु औषधालयों और चिकित्सालयों में कुल 11 पद रिक्त पड़े हैं। इनमें एक डॉक्टर और 10 फार्मासिस्ट के पद शामिल हैं। पूरे क्षेत्र में 25 औषधालयों में से 10 में ताले लटके हुए हैं। यहां फार्मासिस्ट के पद काफी लंबे समय से खाली चल रहे हैं। क्षेत्र के थरोला, सतान्डी, गरावग, चमैत, प्रेम नगर, बखोल, खनेटी, कोटी, रामनगर और बाघी में पशुपालकों को उपचार के लिए कोई विकल्प नहीं है। यहां के ही क्यारी पशु चिकित्सालय में डॉक्टर का पद भी बीते लंबे समय से रिक्त पड़ा है। बागडुमैर पंचायत की प्रधान उर्मिला जस्टा ने बताया कि यहां लोगों ने पशुपालन को बागवानी के साथ अपनाया हुआ है। हर तीसरे घर में महंगी देसी और विदेशी किस्म की गायें पाली हुई हैं, लेकिन समय पर टीकाकरण ने होने से लोगों को परेशानी हो रही है। थरोला पंचायत के प्रधान जोगिद्र सिंह ने बताया कि उपमंडल में कई औषधालय में फार्मासिस्ट के पद पिछले एक से छह वर्षों से रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आमदनी का एक बड़ा जरिया है। समय पर टीकाकरण न होने से कई गायें बांझ हो रही हैं। पशु चिकित्सा सेवाओं की कमी से सीधे तौर पर लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि हर गांव में लोगों की सुविधा के लिए पशु चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के पदों को शीघ्र भरा जाए। ग्रामीणों ने सरकार और पशुपालन विभाग से मांग की है कि जल्द इन रिक्त पदों को भरा जाए, ताकि क्षेत्र के पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं की सही देखभाल सुनिश्चित हो सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। उपमंडल में पशु चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल है। सरकार एक ओर पशु संवर्धन और संरक्षण के लिए योजनाएं बना रही है, वहीं दस औषधालय में लंबे समय से ताले लटके हुए हैं। क्षेत्र के पशुपालकों को टीकाकरण और पशुओं के उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। कोटखाई उपमंडल के विभिन्न पशु औषधालयों और चिकित्सालयों में कुल 11 पद रिक्त पड़े हैं। इनमें एक डॉक्टर और 10 फार्मासिस्ट के पद शामिल हैं। पूरे क्षेत्र में 25 औषधालयों में से 10 में ताले लटके हुए हैं। यहां फार्मासिस्ट के पद काफी लंबे समय से खाली चल रहे हैं। क्षेत्र के थरोला, सतान्डी, गरावग, चमैत, प्रेम नगर, बखोल, खनेटी, कोटी, रामनगर और बाघी में पशुपालकों को उपचार के लिए कोई विकल्प नहीं है। यहां के ही क्यारी पशु चिकित्सालय में डॉक्टर का पद भी बीते लंबे समय से रिक्त पड़ा है। बागडुमैर पंचायत की प्रधान उर्मिला जस्टा ने बताया कि यहां लोगों ने पशुपालन को बागवानी के साथ अपनाया हुआ है। हर तीसरे घर में महंगी देसी और विदेशी किस्म की गायें पाली हुई हैं, लेकिन समय पर टीकाकरण ने होने से लोगों को परेशानी हो रही है। थरोला पंचायत के प्रधान जोगिद्र सिंह ने बताया कि उपमंडल में कई औषधालय में फार्मासिस्ट के पद पिछले एक से छह वर्षों से रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आमदनी का एक बड़ा जरिया है। समय पर टीकाकरण न होने से कई गायें बांझ हो रही हैं। पशु चिकित्सा सेवाओं की कमी से सीधे तौर पर लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि हर गांव में लोगों की सुविधा के लिए पशु चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के पदों को शीघ्र भरा जाए। ग्रामीणों ने सरकार और पशुपालन विभाग से मांग की है कि जल्द इन रिक्त पदों को भरा जाए, ताकि क्षेत्र के पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं की सही देखभाल सुनिश्चित हो सके।