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Rampur Bushahar News: चौपाल वन मंडल में कर्मचारियों का टोटा, जंगलों को बचाना बना चुनौती
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू) । वन मंडल चौपाल फील्ड स्टाफ के 50 प्रतिशत से भी अधिक पद खाली चल रहे हैं। वन विभाग में रेंज अधिकारियों के सात पद हैं, लेकिन मात्र दो रेंज अधिकारी काम कर रहे हैं। 22 डिप्टी रेंजर में से मात्र चार डिप्टी रेंजर तैनात हैं। इसके अलावा 81 वन रक्षकों में से 54 वन रक्षक सेवाएं दे रहे हैं। वन मंडल में स्टाफ की कमी के कारण जंगलों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। जंगलों में अवैध कटान को रोकना मुश्किल हो गया है, जिससे जंगलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वहीं, वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में है। आग की घटनाओं के दौरान भी बचाव कार्य के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। चौपाल के वन मंडलाधिकारी जंगवीर सिंह दुलटा ने बताया कि चौपाल क्षेत्र बहुत बिखरा हुआ क्षेत्र है। यहां वन संपदा को बचाने के लिए अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है। जहां से अवैध कटान की शिकायत मिली है, वह वहां पर पूरी नजर बनाए हुए हैं। स्टाफ की कमी के बावजूद विभाग के कर्मचारियों ने दस माह में 12 गाड़ियां अवैध स्लीपर की पकड़ी हैं। वनों को आग से बचाने के लिए भी विभाग प्रयासरत है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर आग लगाने वाले शरारती तत्व पर भी कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।
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चौपाल (रोहड़ू) । वन मंडल चौपाल फील्ड स्टाफ के 50 प्रतिशत से भी अधिक पद खाली चल रहे हैं। वन विभाग में रेंज अधिकारियों के सात पद हैं, लेकिन मात्र दो रेंज अधिकारी काम कर रहे हैं। 22 डिप्टी रेंजर में से मात्र चार डिप्टी रेंजर तैनात हैं। इसके अलावा 81 वन रक्षकों में से 54 वन रक्षक सेवाएं दे रहे हैं। वन मंडल में स्टाफ की कमी के कारण जंगलों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। जंगलों में अवैध कटान को रोकना मुश्किल हो गया है, जिससे जंगलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वहीं, वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में है। आग की घटनाओं के दौरान भी बचाव कार्य के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। चौपाल के वन मंडलाधिकारी जंगवीर सिंह दुलटा ने बताया कि चौपाल क्षेत्र बहुत बिखरा हुआ क्षेत्र है। यहां वन संपदा को बचाने के लिए अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है। जहां से अवैध कटान की शिकायत मिली है, वह वहां पर पूरी नजर बनाए हुए हैं। स्टाफ की कमी के बावजूद विभाग के कर्मचारियों ने दस माह में 12 गाड़ियां अवैध स्लीपर की पकड़ी हैं। वनों को आग से बचाने के लिए भी विभाग प्रयासरत है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर आग लगाने वाले शरारती तत्व पर भी कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।