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Rampur Bushahar News: कूपा बांध की सुंदरता में बंधने लगे प्रवासी परिंदे

Wed, 21 Oct 2026 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:25 PM IST
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Sangala Valley becomes a favorite destination for migratory birds
कुप्पा डैम में पहुंचे पक्षी। स्रोत: वन विभाग
प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बनी सांगला घाटी, 16 प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी दर्ज
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वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीम ने पांच घंटे तक किया पक्षी अवलोकन
. अक्तूबर से मार्च-अप्रैल तक पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी

संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की सांगला घाटी के कूपा बांध की सुंदरता प्रवासी परिंदों को बांधने लगी है। यहां किए गए पक्षी अवलोकन के दौरान प्रवासी परिंदों की 16 प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें जलीय पक्षियों के साथ बस्पा नदी और आसपास की जलधाराओं में पाए जाने वाले पक्षी भी शामिल हैं। पक्षियों की यह विविधता क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों के महत्त्व को उजागर करती है। वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीम ने कूपा बांध और आसपास के संभावित पक्षी आवासों का सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक अवलोकन किया। अभियान में वन खंड अधिकारी गोपाल नेगी, वन खंड अधिकारी संतोष ठाकुर, वन मित्र कुमारी अल्पना और बर्डर तेनजिन नेगी शामिल रहे। टीम ने विभिन्न स्थलों पर पक्षियों का अवलोकन कर उनकी प्रजातियों को दर्ज किया।
ये प्रजातियां पाईं गईं
अवलोकन के दौरान आइबिसबिल, यूरेशियन कूट, कॉमन टील, गार्गनी, ग्रेट कॉर्मोरेंट, नॉर्दर्न शोवलर, फेरुजिनस डक, मल्लार्ड, नॉर्दर्न पिंटेल, गैडवाल, ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट, व्हाइट-कैप्ड रेडस्टार्ट, प्लम्बियस वॉटर रेडस्टार्ट, ब्राउन डिपर, कॉमन सैंडपाइपर और ग्रीन सैंडपाइपर की मौजूदगी दर्ज की गई। इनमें कई प्रजातियां जलाशयों और नदी तटीय क्षेत्रों में भोजन की तलाश और विश्राम के लिए पहुंचती हैं। कूपा बांधा और आसपास का प्राकृतिक परिवेश इन पक्षियों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध करवाता है। नियमित अवलोकन से उनकी मौसमी गतिविधियों, प्रजातीय विविधता और प्राकृतिक आवासों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
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बर्डवॉचिंग और प्रकृति पर्यटन की संभावनाएं
सांगला घाटी की भौगोलिक स्थिति, बस्पा नदी का प्राकृतिक परिवेश और आसपास के विविध आवास इसे पक्षी अवलोकन तथा जैव विविधता के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। कूपा बांध में विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी से क्षेत्र में बर्डवॉचिंग, प्रकृति फोटोग्राफी और पर्यावरण आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी सामने आई हैं। स्थानीय युवाओं को पक्षियों की पहचान, प्रकृति मार्गदर्शन और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देकर संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। इसके लिए प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और पर्यटन गतिविधियों का जिम्मेदारी से संचालन आवश्यक होगा। प्राकृतिक आवासों का संरक्षण जरूरी पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास बनाए रखने के उद्देश्य से जलस्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना, प्लास्टिक और अन्य कचरे पर नियंत्रण करना तथा पक्षियों को अनावश्यक रूप से परेशान करने से बचना जरूरी है। स्थानीय समुदायों, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों की भागीदारी से इन क्षेत्रों का संरक्षण अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कूपा डैम में पक्षियों की मौजूदगी का दस्तावेजीकरण किन्नौर की प्राकृतिक संपदा को समझने और संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित निगरानी से न केवल पक्षी विविधता से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकेगी, बल्कि क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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प्रवासी पक्षियों की निगरानी करने के दिए निर्देश
सराहन वन्यप्राणी मंडल के उप अरण्यपाल (आईएफएस) अशोक नेगी ने बताया कि प्रवासी पक्षी हर वर्ष अक्तूबर में कूपा बांध क्षेत्र में पहुंचते हैं और मार्च-अप्रैल तक यहां रहते हैं। उन्होंने कहा कि वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला की टीमों को हर वर्ष की तरह इस बार भी कूपा बांध और अन्य संभावित क्षेत्रों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि निगरानी के माध्यम से पक्षियों की पहचान और गणना करने के साथ ही उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। नियमित सर्वेक्षण से क्षेत्र में आने वाली पक्षी प्रजातियों और उनकी मौसमी उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

कुप्पा डैम में पहुंचे पक्षी। स्रोत: वन विभाग

कुप्पा डैम में पहुंचे पक्षी। स्रोत: वन विभाग

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