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Rampur Bushahar News: तांगनू में किसानों औषधीय पौधे उगाने के बताए गुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला के दूरदराज के गांव तांगनू में लोगों को औषधीय पौधों की खेती के बारे में जागरूक किया गया।यह शिविर कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू एवं त्रिदेव औषधीय पौध उत्पादन सोसायटी चिड़गांव के सहयोग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डाॅ जगदीश सिंह ने बताया कि क्षेत्र की जलवायु महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की खेती लिए उपयुक्त है।
औषधीय पौधों की खेती से स्थानीय लोग सेब के बगीचे के अतिरिक्त आय ले सकते हैं। बगीचों में किसान मुश्कबाला, करू, चोरा, सलममिसरी सेब के बगीचे में अंतरवर्तीय फसल के रूप में उगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान ने वनककड़ी, करू और मुश्कबाला जैसी महत्वपूर्ण समशीतोष्ण औषधीय पौधों की उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की पहचान कर ली है।
अब इनकी खेती के लिए विभिन्न हित धारकों के बीच पौधे वितरित किए जा रहे हैं। डॉ. संदीप शर्मा ने करू और मुश्कवाला की नर्सरी तकनीक की जानकारी भी साझा की। डॉ. जोगिंद्र सिंह चौहान, मुख्य तकनीकी अधिकारी ने हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों के पारंपरिक उपयोग की जानकारी दी।
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डॉ. नरेंद्र कायथ प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू ने कहा कि उनके द्वारा औषधीय पौधों को उगाने के लिए हर संभव लोगों की सहायता के साथ प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अवसर पर त्रिदेव औषधीय सोसाइटी के सचिव कृपाल सिंह, कृषि विज्ञान रोहड़ू के वैज्ञानिक डॉ दिनेश शर्मा, स्वराज सिंह मौजूद रहे।
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रोहड़ू। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला के दूरदराज के गांव तांगनू में लोगों को औषधीय पौधों की खेती के बारे में जागरूक किया गया।यह शिविर कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू एवं त्रिदेव औषधीय पौध उत्पादन सोसायटी चिड़गांव के सहयोग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम में डाॅ जगदीश सिंह ने बताया कि क्षेत्र की जलवायु महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की खेती लिए उपयुक्त है।
औषधीय पौधों की खेती से स्थानीय लोग सेब के बगीचे के अतिरिक्त आय ले सकते हैं। बगीचों में किसान मुश्कबाला, करू, चोरा, सलममिसरी सेब के बगीचे में अंतरवर्तीय फसल के रूप में उगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान ने वनककड़ी, करू और मुश्कबाला जैसी महत्वपूर्ण समशीतोष्ण औषधीय पौधों की उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की पहचान कर ली है।
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अब इनकी खेती के लिए विभिन्न हित धारकों के बीच पौधे वितरित किए जा रहे हैं। डॉ. संदीप शर्मा ने करू और मुश्कवाला की नर्सरी तकनीक की जानकारी भी साझा की। डॉ. जोगिंद्र सिंह चौहान, मुख्य तकनीकी अधिकारी ने हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों के पारंपरिक उपयोग की जानकारी दी।
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डॉ. नरेंद्र कायथ प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू ने कहा कि उनके द्वारा औषधीय पौधों को उगाने के लिए हर संभव लोगों की सहायता के साथ प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस अवसर पर त्रिदेव औषधीय सोसाइटी के सचिव कृपाल सिंह, कृषि विज्ञान रोहड़ू के वैज्ञानिक डॉ दिनेश शर्मा, स्वराज सिंह मौजूद रहे।