फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   rampur news, vollyefid disease, apple, plants,

Rampur Bushahar News: सेब के पौधें में फैल रहा वूलीएफिड संक्रमण

Tue, 12 Sep 2023 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Sep 2023 11:15 PM IST
विज्ञापन
रोहड़ू। बारिश रुकने के बाद सेब के बगीचों में वूली एफिड का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। बगीचों में वूली एफिड परजीवी कीट के हमले से पौधों की छाल और बीमों को नुकसान हो रहा है। मौसम में बदलाव के बाद बगीचों में परजीवी कीट का संक्रमण बागवानों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।
विज्ञापन


सेब उत्पादक क्षेत्र के अधिकांश बगीचों में इस बार वूली एफिड बारिश रुकने के बाद तेजी से फैल रहा है। इसके हमले से सेब के पौधों की छाल खराब हो रही है। पत्तियों और अगले साल के लिए तैयार होने वाले बीमे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। बगवानी विशेषज्ञ डाॅ आग्रदास का कहना है कि वूली एफिड के संक्रमण की कई स्थानों से सूचना मिल रही है।
विज्ञापन


सेब की फसल तुड़ान पूरा होने के बाद इसके कीट को रोकने के लिए कीटनाशक की सिफारिश की जा सकती है। सेब तुड़ान के बाद बागवान विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार वूली एफिड को रोकने के लिए छिड़काव कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सेब की टहनियों पर रूई या बर्फ के फाहे की तरह सफेद पदार्थ जमा हुआ वूली एफिड होता है। इसके अंदर गहरे लाल और भूरे रंग के छोटे-छोटे कीड़े जमा होते है। वूली एफिड कीट पेड़ की छाल, तना और शाखाओं का रस चूसता है। इससे पौधे में गांठे बन जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सर्दियों में कीट जड़ों में पहुंच जाता है। इससे वह जड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधे का विकास रुक जाता है। बीमें क्षतिग्रस्त होने से पेड़ की फल लगने की क्षमता भी कम हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि वूली एफिड़ कीट की साल में तेरह पीढि़यां होती है। कीट पैदा होने के 24 घंटे में सफेद रूई की तरह का पदार्थ छोड़ते हैं।


कीट इसके सुरक्षा चक्र में बचा रहता है। इसकी रोकथाम के लिए रासायनिक प्रबंधन उचित तरीका है। उन्होंने सलाह दी कि सेब तुड़ान के तुरंत बाद बागवान रोकथाम के लिए रसायन का छिडक़ाव विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें। इसके बाद सर्दियों में काटछांट के दौरान वूली एफिड से क्षतिग्रस्त टहनियों को हटाकर कीट का जड़ों में भी उपचार करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed