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Rampur Bushahar News: देवता रमनाल्टू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की हुई प्राण प्रतिष्ठा
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झझवानी में 22 वर्षों के बाद काष्ठकुणी शैली में बनकर तैयार हुआ देवता रमनाल्टू का भव्य मंदिर
मेहमान देवताओं के विदाई का कार्यक्रम निभाई गई उछड़-पाछड़ की रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। छौहारा क्षेत्र के अंतर्गत झंझवानी गांव में देवता रमनाल्टू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वीरवार को संपन्न हुई। वीरवार को प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शिखा पूजन की मुख्य रस्म निभाई गई। इस दौरान देवता जाबल नारायण, देवता गोक्सी नारायण, मेजबान देवता रामणी नारायण, देवता पवासी मंगयारी औरदेवता किलबालु विशेष रूप से मौजूद रहे। नवनिर्मित मंदिर परिसर में चल रहे यज्ञ में वीरवार को पूर्ण आहुति दी गई। वीरवार दोपहर के बाद शिखा पूजन की रस्म मेहमान देवताओं की उपस्थिति में हुई। इस दौरान देवलु पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देवताओं का मिलन और देवताओं के साथ देवलुओं का नृत्य रहा। शिखा पूजन की रस्म नवनिर्मित मंदिर की छत पर मंत्रोच्चारण के साथ की गई। इस दौरान सभी देवलुओं के लिए मंदिर कमेटी की ओर से धाम की व्यवस्था भी की गई थी। देवता के मंदिर को तैयार करने में स्थानीय ग्रामीणों को 22 वर्ष लगे। काष्ठकुणी शैली में बनकर तैयार हुए भव्य मंदिर पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई है। देवता रमनाल्टु महाराज के मोतमीन ठाकुर सैन ने बताया कि शिखा पूजन की रस्म के साथ ही देवता महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो गई है। अनुष्ठान को पूरा करने में झंझवाणी, मंगयारी और ग्यारी गांव सहित प्रदेश सरकार का सहयोग रहा है। शुक्रवार को मेहमान देवताओं की विदाई का कार्यक्रम में उछड़-पाछड़ की रस्म निभाई जाएगी। सभी ग्रामीणों के सहयोग से अनुष्ठान का सफल आयोजन किया गया है।
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मेहमान देवताओं के विदाई का कार्यक्रम निभाई गई उछड़-पाछड़ की रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। छौहारा क्षेत्र के अंतर्गत झंझवानी गांव में देवता रमनाल्टू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वीरवार को संपन्न हुई। वीरवार को प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में शिखा पूजन की मुख्य रस्म निभाई गई। इस दौरान देवता जाबल नारायण, देवता गोक्सी नारायण, मेजबान देवता रामणी नारायण, देवता पवासी मंगयारी औरदेवता किलबालु विशेष रूप से मौजूद रहे। नवनिर्मित मंदिर परिसर में चल रहे यज्ञ में वीरवार को पूर्ण आहुति दी गई। वीरवार दोपहर के बाद शिखा पूजन की रस्म मेहमान देवताओं की उपस्थिति में हुई। इस दौरान देवलु पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देवताओं का मिलन और देवताओं के साथ देवलुओं का नृत्य रहा। शिखा पूजन की रस्म नवनिर्मित मंदिर की छत पर मंत्रोच्चारण के साथ की गई। इस दौरान सभी देवलुओं के लिए मंदिर कमेटी की ओर से धाम की व्यवस्था भी की गई थी। देवता के मंदिर को तैयार करने में स्थानीय ग्रामीणों को 22 वर्ष लगे। काष्ठकुणी शैली में बनकर तैयार हुए भव्य मंदिर पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत आई है। देवता रमनाल्टु महाराज के मोतमीन ठाकुर सैन ने बताया कि शिखा पूजन की रस्म के साथ ही देवता महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो गई है। अनुष्ठान को पूरा करने में झंझवाणी, मंगयारी और ग्यारी गांव सहित प्रदेश सरकार का सहयोग रहा है। शुक्रवार को मेहमान देवताओं की विदाई का कार्यक्रम में उछड़-पाछड़ की रस्म निभाई जाएगी। सभी ग्रामीणों के सहयोग से अनुष्ठान का सफल आयोजन किया गया है।