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Rampur Bushahar News: 181 वर्षों के बाद हनुमान मंदिर से बाहर निकले रामलला, दर्शन कर भावुक हुए लोग
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पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की पालकी पर विराजमान हुए रामलला, राम मंदिर निर्माण की खुशी से भक्तिरस में डूबे हजारों लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक पल के करोड़ों लोग साक्षी बने। रामधुन में डूबे रामपुर शहर में भी प्राण प्रतिष्ठा के पर्व को दिवाली के स्वरूप में मनाया गया। सुबह से लेकर शाम तक लोग जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। कहीं भजन मंडली, तो कहीं भगवान राम की शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। शहर के हर कोने में लंगर, भंडारे और जलपान की व्यवस्था रही। हर स्थान पर लोगों की भीड़ रामरस में डूबी दिखी। अयोध्या में भगवान राम की घर वापसी के साथ रामपुर शहर के लिए यह प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा। हजारों लोग शहर में एकत्रित हुए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। रामपुर के श्री सत्यनारायण मंदिर में स्थित भगवान श्रीकृष्ण की पालकी में पहली बार भगवान रामलला विराजमान हुए। हर वर्ष जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण इस पालकी में विराजमान होते हैं, वहीं मंदिर के इतिहास में पहली बार इस पालकी में भगवान श्रीराम लला विराजे। विश्व हिंदू परिषद द्वारा सत्यनारायण मंदिर से पालकी को प्राचीन हनुमानघाट मंदिर पहुंचाया गया। यहां से श्रीरामलला पालकी में सवार हुए। करीब 181 वर्ष के बाद हनुमान मंदिर से भगवान श्रीराम की मूर्ति बाहर निकाली गई और पालकी पर विराजमान हुई। पालकी में विराजमान रामलला को देखकर हर कोई भाव विभोर हो गया। शोभायात्रा के दीदार कर लोग भावुक हो गए। शहर में निकली शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए और श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। शहर के मध्य में स्थित सत्यनारायण मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन चलता रहा। श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विभिन्न स्थानों पर भंडारे और जलपान का आयोजन किया गया। शहर के शनि मंदिर से लेकर दूसरे छोर पर स्थित कन्या स्कूल तक भंडारे आयोजित हुए। सभी स्थानों में लोगों ने भंडारे का प्रसाद चखा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक पल के करोड़ों लोग साक्षी बने। रामधुन में डूबे रामपुर शहर में भी प्राण प्रतिष्ठा के पर्व को दिवाली के स्वरूप में मनाया गया। सुबह से लेकर शाम तक लोग जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। कहीं भजन मंडली, तो कहीं भगवान राम की शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। शहर के हर कोने में लंगर, भंडारे और जलपान की व्यवस्था रही। हर स्थान पर लोगों की भीड़ रामरस में डूबी दिखी। अयोध्या में भगवान राम की घर वापसी के साथ रामपुर शहर के लिए यह प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा। हजारों लोग शहर में एकत्रित हुए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। रामपुर के श्री सत्यनारायण मंदिर में स्थित भगवान श्रीकृष्ण की पालकी में पहली बार भगवान रामलला विराजमान हुए। हर वर्ष जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण इस पालकी में विराजमान होते हैं, वहीं मंदिर के इतिहास में पहली बार इस पालकी में भगवान श्रीराम लला विराजे। विश्व हिंदू परिषद द्वारा सत्यनारायण मंदिर से पालकी को प्राचीन हनुमानघाट मंदिर पहुंचाया गया। यहां से श्रीरामलला पालकी में सवार हुए। करीब 181 वर्ष के बाद हनुमान मंदिर से भगवान श्रीराम की मूर्ति बाहर निकाली गई और पालकी पर विराजमान हुई। पालकी में विराजमान रामलला को देखकर हर कोई भाव विभोर हो गया। शोभायात्रा के दीदार कर लोग भावुक हो गए। शहर में निकली शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए और श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। शहर के मध्य में स्थित सत्यनारायण मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन चलता रहा। श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विभिन्न स्थानों पर भंडारे और जलपान का आयोजन किया गया। शहर के शनि मंदिर से लेकर दूसरे छोर पर स्थित कन्या स्कूल तक भंडारे आयोजित हुए। सभी स्थानों में लोगों ने भंडारे का प्रसाद चखा।