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Rampur Bushahar News: 22 केवी लाइन टूटने से नेरवा के हजारों उपभोक्ता झेल रहे परेशानी
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एक सप्ताह में तीन बार टूट चुकी है लाइन, ग्रामीणों ने समस्या के समाधान की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। झिकनीपुल और नेरवा के बीच विद्युत आपूर्ति करने वाली 22 केवी विद्युत लाइन के बार-बार टूटने से नेरवा तहसील के हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। हालत यह है कि बीते सप्ताह में तीन बार लाइन टूट चुकी है। इस वजह से क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहा। लोगों ने बताया कि लाइन टूटने पर साफ मौसम में भी उसे बहाल करने में पांच से छह घंटे का समय लग जाता है। विद्युत बोर्ड के मुताबिक सात किलोमीटर लंबी लाइन 1984 में बिछाई गई थी। उस समय उपभोक्ताओं की संख्या आज की अपेक्षा दसगुना कम थी। लिहाजा लाइन पर लोड भी कम था। उन्होंने बताया कि स्कूलों में छुट्टियां होने के कारण अब शहरों से अधिकांश लोग गांव आ गए हैं। अभी बर्फबारी भी नहीं हुई और इससे पहले बिजली के तार टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे उपभोक्ताओं को अभी से ही दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। विद्युत उपमंडल नेरवा में दो वर्ष पूर्व लाइन बदलने का एस्टीमेट बनाकर भेज चुका है लेकिन अभी तक उच्चाधिकारियों से इसकी मंजूरी नहीं मिली है। इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए विद्युत उपमंडल नेरवा के कनिष्ठ अभियंता से संपर्क साधने का प्रयास किया गया लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो पाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। झिकनीपुल और नेरवा के बीच विद्युत आपूर्ति करने वाली 22 केवी विद्युत लाइन के बार-बार टूटने से नेरवा तहसील के हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। हालत यह है कि बीते सप्ताह में तीन बार लाइन टूट चुकी है। इस वजह से क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहा। लोगों ने बताया कि लाइन टूटने पर साफ मौसम में भी उसे बहाल करने में पांच से छह घंटे का समय लग जाता है। विद्युत बोर्ड के मुताबिक सात किलोमीटर लंबी लाइन 1984 में बिछाई गई थी। उस समय उपभोक्ताओं की संख्या आज की अपेक्षा दसगुना कम थी। लिहाजा लाइन पर लोड भी कम था। उन्होंने बताया कि स्कूलों में छुट्टियां होने के कारण अब शहरों से अधिकांश लोग गांव आ गए हैं। अभी बर्फबारी भी नहीं हुई और इससे पहले बिजली के तार टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे उपभोक्ताओं को अभी से ही दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। विद्युत उपमंडल नेरवा में दो वर्ष पूर्व लाइन बदलने का एस्टीमेट बनाकर भेज चुका है लेकिन अभी तक उच्चाधिकारियों से इसकी मंजूरी नहीं मिली है। इस संबंध में प्रतिक्रिया के लिए विद्युत उपमंडल नेरवा के कनिष्ठ अभियंता से संपर्क साधने का प्रयास किया गया लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो पाए।