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Rampur Bushahar News: गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान दे सरकार, दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में हो शिक्षकों की तैनाती
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समाजसेवी दौलत राम नेगी
17 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर लोगों को सरकार से कई उम्मीदें, शिक्षा में सुधार की लगाई आस
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सुक्खू सरकार की ओर से 17 फरवरी को पेश किए जा रहे बजट से क्षेत्र के लोगों और युवाओं को गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान देने की उम्मीद है। लोगों का कहना है कि कोरोनाकाल के दौरान विद्यार्थियों के लिखने, सीखने और पढ़ने की क्षमता में गिरावट आई है। ऐसे में इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को एक विस्तृत कार्य योजना बनाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाते समय गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षा पर अधिक बजट का प्रावधान करके भी सरकार शैक्षणिक संस्थानों के आधारभूत ढांचे में सुधार करने के साथ ही स्टाफ की कमी को भी दूर करने की उम्मीद लोगों को वर्तमान सरकार से है। 17 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर लोगों ने अपनी राय रखी।
कोट्स
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था एक समान होनी चाहिए। सरकार को यह सोचने की जरूरत है कि शिक्षा का निजीकरण क्यों हो रहा हैं? वर्तमान सरकार का प्राइमरी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाने का फैसला सराहनीय है। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती उचित संख्या सुनिश्चित होनी चाहिए। उम्मीद है कि प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के साथ बेहतरीन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लोगों का निजी स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों की ओर रुझान बढ़े।
दौलत राम नेगी, समाजसेवी
कोट्स
सरकार बजट में बेरोजगार, बीएड धारकों को स्थायी नौकरी देने के लिए बैचवाइज और कमीशन के माध्यम से शिक्षकों के पदों की भर्ती करने के लिए प्रावधान करे, जिससे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र के स्कूलों में खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति हो सकें। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार बेरोजगार बीएड धारकों के लिए बजट में विशेष प्रावधान करेगी।
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रवीना नेगी, बेरलंगी
कोट्स
प्रदेश के कई दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अकसर राजनीतिक पहुंच होने पर शिक्षक ऐसे स्थानों से तबादला करवा देते हैं। इस बजट में सुक्खू सरकार से उम्मीद है कि शिक्षकों के तबादले को लेकर एक स्थायी पॉलिसी बनाई जाए, जिससे दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
अश्वनी नेगी, काफनू
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सुक्खू सरकार की ओर से 17 फरवरी को पेश किए जा रहे बजट से क्षेत्र के लोगों और युवाओं को गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान देने की उम्मीद है। लोगों का कहना है कि कोरोनाकाल के दौरान विद्यार्थियों के लिखने, सीखने और पढ़ने की क्षमता में गिरावट आई है। ऐसे में इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को एक विस्तृत कार्य योजना बनाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाते समय गुणवत्तायुक्त शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षा पर अधिक बजट का प्रावधान करके भी सरकार शैक्षणिक संस्थानों के आधारभूत ढांचे में सुधार करने के साथ ही स्टाफ की कमी को भी दूर करने की उम्मीद लोगों को वर्तमान सरकार से है। 17 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर लोगों ने अपनी राय रखी।
कोट्स
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था एक समान होनी चाहिए। सरकार को यह सोचने की जरूरत है कि शिक्षा का निजीकरण क्यों हो रहा हैं? वर्तमान सरकार का प्राइमरी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाने का फैसला सराहनीय है। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती उचित संख्या सुनिश्चित होनी चाहिए। उम्मीद है कि प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के साथ बेहतरीन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लोगों का निजी स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों की ओर रुझान बढ़े।
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दौलत राम नेगी, समाजसेवी
कोट्स
सरकार बजट में बेरोजगार, बीएड धारकों को स्थायी नौकरी देने के लिए बैचवाइज और कमीशन के माध्यम से शिक्षकों के पदों की भर्ती करने के लिए प्रावधान करे, जिससे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र के स्कूलों में खाली पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति हो सकें। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार बेरोजगार बीएड धारकों के लिए बजट में विशेष प्रावधान करेगी।
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रवीना नेगी, बेरलंगी
कोट्स
प्रदेश के कई दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली होने से बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। अकसर राजनीतिक पहुंच होने पर शिक्षक ऐसे स्थानों से तबादला करवा देते हैं। इस बजट में सुक्खू सरकार से उम्मीद है कि शिक्षकों के तबादले को लेकर एक स्थायी पॉलिसी बनाई जाए, जिससे दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
अश्वनी नेगी, काफनू

समाजसेवी दौलत राम नेगी

समाजसेवी दौलत राम नेगी