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Rampur Bushahar News: जांगलिख में फाग मेला आज से
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बर्फ के गोले मारकर देवता का किया जाएगा अभिनंदन
मेले में पारंपरिक व्यंजनों से होगी मेहमानों की खातीरदारी
राजेश हंसरेटा।
रोहड़ू। छौहारा विकास खंड के सबसे दुर्गम गांव जांगलिख में अनूठा फाग मेला बुधवार 21 फरवरी से आरंभ होगा। वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला मेला तीन दिनों तक चलेगा। मेले में बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करने की अनोखी परंपरा है। इसी परंपरा को देखने के लिए दूर दूर से लोग जांगलिख गांव पहुंचते हैं।
देवता साहिब जाख के आह्वान पर होने वाला फाग मेला 21 से 23 फरवरी तक चलेगा। लोग पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पर बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करते हैं। उसके बाद लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नाचेंगे। मेले में मेहमानों की खातिरदारी पारंपरिक एवं अनूठे व्यंजनों से की जाती है। फाग मेले के नियमानुसार स्थानीय ग्रामीण एक-दूसरे के घर मेहमानी करने जाएंगे। पुराना सूखा मीट, ओगल के आटे से बने सिड्डू, शहद तथा अखरोट के तेल से तली रोटियां सहित कई व्यंजन मेहमानों को परोसे जाते हैं।
मेले में रात भर खान-पान का दौर चलता रहता है। देवता जाख जांगलिख के ही आह्वान पर क्षेत्र के गोक्सवाड़ी, तांगणू, पेखा व दिऊदी गांव में भी फाग मेला उसी दिन आयोजित किया जाता है।
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देवता साहिब जाख जागंलिख के पुजारी निशांत, मोतमीन रोशन लाल ने बताया कि फाग मेला सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देवता जाख स्वर्ग से लौटने के बाद स्वयं मेले का दिन निर्धारित करते हैं। मेले की सारी रस्में बाकी अनुष्ठानों से अलग हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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मेले में पारंपरिक व्यंजनों से होगी मेहमानों की खातीरदारी
राजेश हंसरेटा।
रोहड़ू। छौहारा विकास खंड के सबसे दुर्गम गांव जांगलिख में अनूठा फाग मेला बुधवार 21 फरवरी से आरंभ होगा। वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला मेला तीन दिनों तक चलेगा। मेले में बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करने की अनोखी परंपरा है। इसी परंपरा को देखने के लिए दूर दूर से लोग जांगलिख गांव पहुंचते हैं।
देवता साहिब जाख के आह्वान पर होने वाला फाग मेला 21 से 23 फरवरी तक चलेगा। लोग पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पर बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करते हैं। उसके बाद लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर नाचेंगे। मेले में मेहमानों की खातिरदारी पारंपरिक एवं अनूठे व्यंजनों से की जाती है। फाग मेले के नियमानुसार स्थानीय ग्रामीण एक-दूसरे के घर मेहमानी करने जाएंगे। पुराना सूखा मीट, ओगल के आटे से बने सिड्डू, शहद तथा अखरोट के तेल से तली रोटियां सहित कई व्यंजन मेहमानों को परोसे जाते हैं।
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मेले में रात भर खान-पान का दौर चलता रहता है। देवता जाख जांगलिख के ही आह्वान पर क्षेत्र के गोक्सवाड़ी, तांगणू, पेखा व दिऊदी गांव में भी फाग मेला उसी दिन आयोजित किया जाता है।
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देवता साहिब जाख जागंलिख के पुजारी निशांत, मोतमीन रोशन लाल ने बताया कि फाग मेला सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देवता जाख स्वर्ग से लौटने के बाद स्वयं मेले का दिन निर्धारित करते हैं। मेले की सारी रस्में बाकी अनुष्ठानों से अलग हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।