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Rampur Bushahar News: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट मामले में दवा सप्लायर संस्था की मालकिन बरी
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अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रोहड़ू में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में बिलासपुर की दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन को बरी कर दिया गया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 25 जून 2021 को ड्रग्स इंस्पेक्टर रोहड़ू ने चिड़गांव में नृपेन बिस्वास की दुकान का निरीक्षण किया था। नृपेन बिस्वास कथित तौर पर बिना वैध लाइसेंस के एलोपैथिक दवाएं बेचते पाए गए थे। उनके पास से बिलासपुर की एक दवा सप्लायर संस्था की ओर जारी किए गए कुछ खरीद बिल भी कथित तौर पर बरामद हुए। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन ने नृपेन बिस्वास को बिना लाइसेंस के दवाएं बेची थीं। मामले की सुनवाई के दौरान नृपेन बिस्वास का निधन हो गया था। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष नृपेन बिस्वास से कथित तौर पर बरामद बिलों को कानूनी रूप से स्थापित नहीं कर पाया। इन बिलों को ड्रग्स इंस्पेक्टर रोहड़ू के सामने पेश करते समय कोई मेमो या दस्तावेज तैयार नहीं किया गया था। बरामद दवाएं और कथित बिल आपस में मेल नहीं खाते थे। दवा सप्लायर संस्था के परिसर में ड्रग्स इंस्पेक्टर बिलासपुर की ओर से कथित सत्यापन के संबंध में भी कोई निरीक्षण मेमो या अन्य दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं था। अदालत ने कहा कि दवा सप्लायर संस्था को जारी किए गए नोटिसों की तामील का भी कोई संतोषजनक प्रमाण नहीं था। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य में महत्वपूर्ण कड़ियों का अभाव था। नृपेन बिस्वास के खिलाफ लगाए गए आरोपों को दवा सप्लायर संस्था के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इन कमियों के कारण अदालत ने दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रोहड़ू में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में बिलासपुर की दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन को बरी कर दिया गया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 25 जून 2021 को ड्रग्स इंस्पेक्टर रोहड़ू ने चिड़गांव में नृपेन बिस्वास की दुकान का निरीक्षण किया था। नृपेन बिस्वास कथित तौर पर बिना वैध लाइसेंस के एलोपैथिक दवाएं बेचते पाए गए थे। उनके पास से बिलासपुर की एक दवा सप्लायर संस्था की ओर जारी किए गए कुछ खरीद बिल भी कथित तौर पर बरामद हुए। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन ने नृपेन बिस्वास को बिना लाइसेंस के दवाएं बेची थीं। मामले की सुनवाई के दौरान नृपेन बिस्वास का निधन हो गया था। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष नृपेन बिस्वास से कथित तौर पर बरामद बिलों को कानूनी रूप से स्थापित नहीं कर पाया। इन बिलों को ड्रग्स इंस्पेक्टर रोहड़ू के सामने पेश करते समय कोई मेमो या दस्तावेज तैयार नहीं किया गया था। बरामद दवाएं और कथित बिल आपस में मेल नहीं खाते थे। दवा सप्लायर संस्था के परिसर में ड्रग्स इंस्पेक्टर बिलासपुर की ओर से कथित सत्यापन के संबंध में भी कोई निरीक्षण मेमो या अन्य दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं था। अदालत ने कहा कि दवा सप्लायर संस्था को जारी किए गए नोटिसों की तामील का भी कोई संतोषजनक प्रमाण नहीं था। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य में महत्वपूर्ण कड़ियों का अभाव था। नृपेन बिस्वास के खिलाफ लगाए गए आरोपों को दवा सप्लायर संस्था के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इन कमियों के कारण अदालत ने दवा सप्लायर संस्था और उसकी मालकिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।