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Rampur Bushahar News: नप ठियोग को जल्द मिलेंगे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, चुनाव के लिए अधिसूचना जारी
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अगले हफ्ते करवाए जाएंगे चुनाव, दावेदारी के लिए राजनीतिक हलकों में हलचल
तीन मार्च को उपाध्यक्ष और चार मार्च को अध्यक्ष ने अपने पद से दिया था इस्तीफा
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। जल्द ही नगर परिषद ठियोग में रिक्त पड़े अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है। जिला प्रशासन ने एसडीएम ठियोग मुकेश शर्मा को चुनाव करवाने की जिम्मेवारी सौंपी है। एसडीएम मुकेश शर्मा ने कहा कि अगले सप्ताह दोनों पदों के लिए चुनाव करवाए जाएंगे। वर्तमान में नगर परिषद के दोनों महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अधिसूचना जारी होते ही दावेदारी के लिए राजनीतिक हलकों में हलचल शुरू हो गई है। परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने तीन मार्च और अध्यक्ष संजय शर्मा ने चार मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए कांग्रेस और भाजपा में सियासत तेज हो गई है। पिछले वर्ष कांग्रेस के चार पार्षदों में फूट पड़ने के बाद कांग्रेस पर संकट के बादल मंडरा गए थे, लेकिन कांग्रेस ने संजय शर्मा को पार्टी में शामिल करते हुए बाजी अपनी ओर करने में सफलता हासिल कर ली थी। संजय शर्मा ने शहरी अध्यक्ष अनिल ग्रोवर और पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर के समर्थन से अध्यक्ष पद कब्जा जमाया था। दूसरी ओर परिषद के दूसरे महत्वपूर्ण पद के लिए भाजपा ने कांग्रेस की आपसी फूट का फायदा उठाया था और पार्टी समर्थित दिनेश शर्मा को उपाध्यक्ष पद पर काबिज करते हुए कांग्रेस को जवाब दिया था। अब माहौल बदला-बदला है। एक ओर विवेक थापर पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा और उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा के साथ एक-एक साल सत्ता परिवर्तन का वादा करने की बात सामने ला चुके हैं। वहीं, पूर्व उपाध्यक्ष रीना रॉय और पार्षद नीतू मेहता कांग्रेस पार्टी को अपना घर मानती हैं, लेकिन पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर को परोक्ष रूप से सत्ता से दूर रखने की पक्षधर प्रतीत होती दिखाई पड़ती है। तीसरी पार्षद शीला वर्मा भाजपा समर्थित हैं और पार्टी की वफादार मानी जाती हैं। दोनों पदों पर चुनाव होने के लिए नियमानुसार पांच पार्षदों का बैठक में शामिल होने पर ही कोरम पूरा होगा। पहली बैठक में कोरम पूरा न होने की सूरत में चार पार्षदों की उपस्थिति के सामान्य कोरम में दोनों पदों के लिए चुनाव किया जाएगा।
- पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि नगर परिषद में पांच कांग्रेस समर्थित पार्षद सेवाएं दे रहे हैं। अध्यक्ष पद पर दावेदारी पर समय और परिस्थिति के अनुसार निश्चित होगी। चुनाव के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
कांग्रेस की फूट का फायदा उठा सकती है भाजपा
सात पार्षदों वाली नगर परिषद में कांग्रेस के पांच और भाजपा के दो पार्षद हैं। पिछले साल कांग्रेस पार्षदों की आपसी फूट का नुकसान पार्टी को हुआ था, जब उपाध्यक्ष पद भाजपा की झोली में आया था। इस बार भी कांग्रेसी पार्षदों की आपसी फूट स्पष्ट दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी प्रदेश में अपनी सरकार के कार्यकाल में परिषद के दोनों पदों पर अपने सिपहसालार बिठा पाती है या भाजपा पिछले साल की तरह कांग्रेस की अंतर्कलह का फायदा उठाने में एक बार फिर सफल हो जाती है।
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दावेदारी पर पार्षदों ने रखी अपनी राय
पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पर स्थिति स्पष्ट न होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विधायक के सामने कांग्रेसी पार्षदों की आपसी फूट का मुद्दा उठाया जाएगा और भाजपा को होने वाले फायदे की स्थिति को भी स्पष्ट किया जाएगा। पूर्व उपाध्यक्ष रीना रॉय ने कहा कि वर्तमान में कुछ भी कहने में असमर्थ हैं, लेकिन दोनों महत्वपूर्ण पदों पर अपनी दावेदारी पेश करने की बात पर उन्होंने विचार करने की बात कही। भाजपा समर्थित शीला वर्मा ने कहा कि वह इन पदों का कार्यभार संभालने के तैयार नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस समर्थित नीतू मेहता ने कहा कि यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर मेरे नाम पर विचार होता है, तो यह जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित परिषद के लिए ही वोट करूंगी। पूर्व अध्यक्ष भाजपा के दिनेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की फूट का फायदा उठाने और भाजपा को सत्ता पर काबिज करने का मौका हाथ से नहीं जाने दिया जाएगा, जबकि अनिल ग्रोवर ने किसी भी पद के लिए दावेदारी पेश करने पर कोई बात नहीं कही। पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा का पक्ष फोन पर संपर्क न होने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है।
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तीन मार्च को उपाध्यक्ष और चार मार्च को अध्यक्ष ने अपने पद से दिया था इस्तीफा
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। जल्द ही नगर परिषद ठियोग में रिक्त पड़े अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है। जिला प्रशासन ने एसडीएम ठियोग मुकेश शर्मा को चुनाव करवाने की जिम्मेवारी सौंपी है। एसडीएम मुकेश शर्मा ने कहा कि अगले सप्ताह दोनों पदों के लिए चुनाव करवाए जाएंगे। वर्तमान में नगर परिषद के दोनों महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अधिसूचना जारी होते ही दावेदारी के लिए राजनीतिक हलकों में हलचल शुरू हो गई है। परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने तीन मार्च और अध्यक्ष संजय शर्मा ने चार मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए कांग्रेस और भाजपा में सियासत तेज हो गई है। पिछले वर्ष कांग्रेस के चार पार्षदों में फूट पड़ने के बाद कांग्रेस पर संकट के बादल मंडरा गए थे, लेकिन कांग्रेस ने संजय शर्मा को पार्टी में शामिल करते हुए बाजी अपनी ओर करने में सफलता हासिल कर ली थी। संजय शर्मा ने शहरी अध्यक्ष अनिल ग्रोवर और पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर के समर्थन से अध्यक्ष पद कब्जा जमाया था। दूसरी ओर परिषद के दूसरे महत्वपूर्ण पद के लिए भाजपा ने कांग्रेस की आपसी फूट का फायदा उठाया था और पार्टी समर्थित दिनेश शर्मा को उपाध्यक्ष पद पर काबिज करते हुए कांग्रेस को जवाब दिया था। अब माहौल बदला-बदला है। एक ओर विवेक थापर पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा और उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा के साथ एक-एक साल सत्ता परिवर्तन का वादा करने की बात सामने ला चुके हैं। वहीं, पूर्व उपाध्यक्ष रीना रॉय और पार्षद नीतू मेहता कांग्रेस पार्टी को अपना घर मानती हैं, लेकिन पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर को परोक्ष रूप से सत्ता से दूर रखने की पक्षधर प्रतीत होती दिखाई पड़ती है। तीसरी पार्षद शीला वर्मा भाजपा समर्थित हैं और पार्टी की वफादार मानी जाती हैं। दोनों पदों पर चुनाव होने के लिए नियमानुसार पांच पार्षदों का बैठक में शामिल होने पर ही कोरम पूरा होगा। पहली बैठक में कोरम पूरा न होने की सूरत में चार पार्षदों की उपस्थिति के सामान्य कोरम में दोनों पदों के लिए चुनाव किया जाएगा।
- पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि नगर परिषद में पांच कांग्रेस समर्थित पार्षद सेवाएं दे रहे हैं। अध्यक्ष पद पर दावेदारी पर समय और परिस्थिति के अनुसार निश्चित होगी। चुनाव के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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कांग्रेस की फूट का फायदा उठा सकती है भाजपा
सात पार्षदों वाली नगर परिषद में कांग्रेस के पांच और भाजपा के दो पार्षद हैं। पिछले साल कांग्रेस पार्षदों की आपसी फूट का नुकसान पार्टी को हुआ था, जब उपाध्यक्ष पद भाजपा की झोली में आया था। इस बार भी कांग्रेसी पार्षदों की आपसी फूट स्पष्ट दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस पार्टी प्रदेश में अपनी सरकार के कार्यकाल में परिषद के दोनों पदों पर अपने सिपहसालार बिठा पाती है या भाजपा पिछले साल की तरह कांग्रेस की अंतर्कलह का फायदा उठाने में एक बार फिर सफल हो जाती है।
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दावेदारी पर पार्षदों ने रखी अपनी राय
पूर्व अध्यक्ष विवेक थापर ने अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पर स्थिति स्पष्ट न होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विधायक के सामने कांग्रेसी पार्षदों की आपसी फूट का मुद्दा उठाया जाएगा और भाजपा को होने वाले फायदे की स्थिति को भी स्पष्ट किया जाएगा। पूर्व उपाध्यक्ष रीना रॉय ने कहा कि वर्तमान में कुछ भी कहने में असमर्थ हैं, लेकिन दोनों महत्वपूर्ण पदों पर अपनी दावेदारी पेश करने की बात पर उन्होंने विचार करने की बात कही। भाजपा समर्थित शीला वर्मा ने कहा कि वह इन पदों का कार्यभार संभालने के तैयार नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस समर्थित नीतू मेहता ने कहा कि यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर मेरे नाम पर विचार होता है, तो यह जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित परिषद के लिए ही वोट करूंगी। पूर्व अध्यक्ष भाजपा के दिनेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की फूट का फायदा उठाने और भाजपा को सत्ता पर काबिज करने का मौका हाथ से नहीं जाने दिया जाएगा, जबकि अनिल ग्रोवर ने किसी भी पद के लिए दावेदारी पेश करने पर कोई बात नहीं कही। पूर्व अध्यक्ष संजय शर्मा का पक्ष फोन पर संपर्क न होने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है।