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Rampur Bushahar News: नए कानूने के विरोध में 12 को देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करेंगे मिड-डे मील कर्मी

Fri, 30 Jan 2026 11:47 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:47 PM IST
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Mid-day meal workers to support nationwide strike on 12th against new law
मिड डे मील वर्कर यूनियन इकाई सराहन के सदस्य बैठक के दौरान। स्रोत : सीटू
. मजदूर विरोधी लेबर कोड निरस्त करने, न्यूनतम वेतन 12,750 देने की उठाई मांग
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. हड़ताल को लेकर सराहन इकाई ने बैठक कर बनाई रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मिड-डे मील वर्कर यूनियन ने सरकार से मजदूर विरोधी नए कानून को निरस्त करने और वर्करों को न्यूनतम वेतन 12750 रुपये देने की मांग की है। सीटू समर्थित मिड-डे मील वर्कर यूनियन की ब्लॉक इकाई सराहन की बैठक शुक्रवार को हुई। इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष मीना ने की। बैठक में 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी हड़ताल को लेकर चर्चा की गई। बैठक में सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, लाल सिंह डिंगटु, यूनियन अध्यक्ष मीना और महासचिव संगीता ने कहा कि 12 फरवरी 2026 की एक दिवसीय देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश में कार्यरत 21 हजार मिड डे मील कर्मियों को मात्र 5000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। वह भी एक साथ नहीं मिलता। वर्करों को 3 माह से वेतन न मिलने से अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने वर्ष 2019 और डबल बेंच के वर्ष 2024 में मिड-डे मील कर्मियों को 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने का फैसला सुनाया, लेकिन प्रदेश सरकार ने फैसले को लागू करने के बजाय इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर अपनी मिड-डे मील वर्कर्स विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है। मिड-डे मील कर्मियों को साल में एक भी छुट्टी नहीं मिलती। आपात, बीमारी और पारिवारिक कार्यक्रमों में छुट्टी करने पर अपनी जगह रिलीवर भेजना पड़ता है। इसकी पांच सौ से सात सौ रुपये की दिहाड़ी का खर्चा भी उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मासिक वेतन को राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 2013 की सिफारिशों को लागू किया। इसमें मिड-डे मील मजदूरों को न्यूनतम वेतन देना, मिड-डे मील मजदूरों को मजदूर की श्रेणी में शामिल करना, मेडिकल की छुट्टियां, पेंशन व ग्रेच्युटी को लागू करने की बात की थी, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई है। इसके चलते बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद किए गए और कई मिड-डे मील वर्करों की नौकरी चली गई। यूनियन ने कहा कि यूनियन आने वाले समय में संघर्ष तेज करेगी और मजदूर विरोधी लेबर कोड को निरस्त करने के खिलाफ 12 फरवरी देशव्यापी हड़ताल में शामिल होगी। इस मौके पर कृष्णा, राधा, गीता, सीता, सुमित्रा, राधा देवी सहित अन्य मौजूद रहे।

ये मांगे उठाईं
यूनियन ने प्रदेश सरकार से बंद किए गए स्कूलों से मर्ज किए गए स्कूलों में वर्करों को समायोजित करने की मांग उठाई है। इसके अलावा मजदूर विरोधी लेबर कोड निरस्त करने, मिड-डे मील कर्मियों को प्रतिमाह पहली तारीख को वेतन देने, न्यूनतम वेतन 12750 रुपये देने और वेतन की स्लिप देने की मांग उठाई है। वर्करों के छह माह बाद होने वाले मेडिकल टेस्ट निशुल्क करवाने, आंगनबाड़ी की तर्ज पर एक साल में 20 छुट्टियां देने, आंगनबाड़ी, आशा कर्मियों की तर्ज पर साल में दो वर्दी देने और पोलिंग पार्टी को खाना बनाने के लिए मिड-डे मील वर्कर को प्रतिदिन एक हजार रुपये दिहाड़ी देने की मांग उठाई है। साथ ही चुनाव पार्टी के लिए खाना बनाने की ड्यूटी न लगाने, महिला कर्मियों को राज्य महिला कर्मचारियों की तर्ज पर रक्षाबंधन, करवा चौथ और भाई दूज की वेतन सहित छुट्टियां देने, साधारण या क्लस्टर स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त मिड-डे मील कर्मियों की नियुक्ति करने की मांग उठाई है।
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