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Rampur Bushahar News: किन्नौर में हाईवे पर जम रहे पानी से सफर बना खतरनाक, रामपुर में शुष्क ठंड ने बिगाड़े हालात
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मलिंग नाले से निकला पानी हाइवे पर जमा हुआ। संवाद
रिकांगपिओ से काजा मार्ग के सबसे ऊंचे प्वाइंट पर स्थित मलिंग नाला जमा
लोगों की मदद से यातायात चल रहा सुचारु, सावधानी जरूरी
रविवार रात को बादल छाने के बाद भी नहीं हुई बर्फबारी, सोमवार को धूप खिली
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। कड़ाके की शुष्क ठंड से दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कई बार बीच में बादल उम्मीद लेकर आ रहे हैं, लेकिन बिना बरसे बादलों के छंट जाने से उम्मीदें धरी की धरी रह जा रही हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड से नाले जमना शुरू हो गए हैं, वहीं नाले का पानी एनएच-पांच पर आकर भी जम रहा है। इससे एनएच-पांच पर वाहन चालकों का सफर खतरनाक हो गया हैं। पेयजल पाइपों में भी पानी जम रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में पेयजल किल्लत भी गहरा रहा है। वहीं, निचले क्षेत्रों में जहां शुष्क ठंड लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, वहीं बागवानी के लिए भी संकट खड़ी कर रही है। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने से मौसम ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जनजातीय जिले किन्नौर में रिकांगपिओ से काजा मार्ग के सबसे ऊंचे प्वाइंट पर स्थित मलिंग नाला भी जम गया है। इससे बहता पानी भी सुबह और रात को एनएच-पांच पर जम रहा है। हालांकि, स्थानीय लोग सुबह हाईवे से जमी बर्फ को साफ कर देते हैं, जिससे यातायात अभी सुचारु से चल रहा है। फिर भी वाहन चालकों को यहां अतिरिक्त सावधान बरतनी पड़ रही है। मलिंग नाला गर्मियों में पानी के बढ़ते जलस्त्रोत के लिए मशहूर है, लेकिन आजकल यह नाला पूरी तरह से जम चुका है। इन दिनों मलिंग गांव और नाले में तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क चुका है। एनएच के किनारे से बहने वाला मलिंग नाला बर्फ के पहाड़ में तब्दील हो चुका है। पर्यटक भी यहां जमे हुए पानी को देखकर आनंदित हो रहे हैं। इस नाले का जलस्त्रोत अब मार्च के आसपास दोबारा पिघलना शुरू होगा। फिलहाल, इस नाले का पानी जमा हुआ है और अपनी प्राकृतिक सौंदर्य से लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वहीं, किन्नौर में रविवार रात को बादल तो छाए, लेकिन वह बिना बरसे से चले गए। सोमवार को मौसम साफ रहेगा। पूरा दिन तेज धूप खिली रही। इस बार जनवरी तक भी बर्फबारी न होने से पर्यटक और कारोबारी मायूस हैं।
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लोगों की मदद से यातायात चल रहा सुचारु, सावधानी जरूरी
रविवार रात को बादल छाने के बाद भी नहीं हुई बर्फबारी, सोमवार को धूप खिली
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। कड़ाके की शुष्क ठंड से दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कई बार बीच में बादल उम्मीद लेकर आ रहे हैं, लेकिन बिना बरसे बादलों के छंट जाने से उम्मीदें धरी की धरी रह जा रही हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड से नाले जमना शुरू हो गए हैं, वहीं नाले का पानी एनएच-पांच पर आकर भी जम रहा है। इससे एनएच-पांच पर वाहन चालकों का सफर खतरनाक हो गया हैं। पेयजल पाइपों में भी पानी जम रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में पेयजल किल्लत भी गहरा रहा है। वहीं, निचले क्षेत्रों में जहां शुष्क ठंड लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं, वहीं बागवानी के लिए भी संकट खड़ी कर रही है। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने से मौसम ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जनजातीय जिले किन्नौर में रिकांगपिओ से काजा मार्ग के सबसे ऊंचे प्वाइंट पर स्थित मलिंग नाला भी जम गया है। इससे बहता पानी भी सुबह और रात को एनएच-पांच पर जम रहा है। हालांकि, स्थानीय लोग सुबह हाईवे से जमी बर्फ को साफ कर देते हैं, जिससे यातायात अभी सुचारु से चल रहा है। फिर भी वाहन चालकों को यहां अतिरिक्त सावधान बरतनी पड़ रही है। मलिंग नाला गर्मियों में पानी के बढ़ते जलस्त्रोत के लिए मशहूर है, लेकिन आजकल यह नाला पूरी तरह से जम चुका है। इन दिनों मलिंग गांव और नाले में तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क चुका है। एनएच के किनारे से बहने वाला मलिंग नाला बर्फ के पहाड़ में तब्दील हो चुका है। पर्यटक भी यहां जमे हुए पानी को देखकर आनंदित हो रहे हैं। इस नाले का जलस्त्रोत अब मार्च के आसपास दोबारा पिघलना शुरू होगा। फिलहाल, इस नाले का पानी जमा हुआ है और अपनी प्राकृतिक सौंदर्य से लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। वहीं, किन्नौर में रविवार रात को बादल तो छाए, लेकिन वह बिना बरसे से चले गए। सोमवार को मौसम साफ रहेगा। पूरा दिन तेज धूप खिली रही। इस बार जनवरी तक भी बर्फबारी न होने से पर्यटक और कारोबारी मायूस हैं।