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Rampur Bushahar News: आनी के देवालयों में रही मकर संक्रांति की धूम
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आनी के शमशरी महादेव मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
17 दिन के स्वर्ग प्रवास पर निकले शमशरी महादेव, तब तक बंद रहेंगे मंदिर के कपाट
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी क्षेत्र में जगह-जगह मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। क्षेत्र के देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने अपने-अपने आराध्य देवताओं के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। इस पर्व का प्रमुख आकर्षण ऐतिहासिक शमशरी महादेव मंदिर रहा, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान महादेव के दर्शन कर शीश नवाया। भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद देवता शमशरी महादेव 17 दिन के स्वर्ग प्रवास के लिए प्रस्थान कर गए। अब मंदिर के कपाट अगले 17 दिनों तक बंद कर दिए गए हैं। मकर संक्रांति के दिन क्षेत्र में घी खिचड़ी पकाने की परंपरा भी पूरे विधि-विधान से निभाई गई। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने घर-घर घी खिचड़ी बनाकर देवताओं को अर्पित की। यह परंपरा पुण्य प्राप्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, जो सदियों से चली आ रही है। शमशरी महादेव मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जो अन्य दिनों से अलग होती है। यहां हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और धार्मिक रीति-रिवाजों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। मकर संक्रांति के दिन कमांद गांव के ग्रामीणों ने भी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन किया। ब्रह्म मुहूर्त में विशेष परंपरा का निर्वहन करते हुए कमांद के ग्रामीण शमशरी महादेव मंदिर पहुंचे और शिवलिंग पर घृत अर्पित कर पूजा-अर्चना की। संक्रांति की रस्म होते ही देवता अपने स्वर्ग प्रवास निकल गए। वहीं, आनी क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी मकर संक्रांति को भारी संख्या में लोग पहुंचे। मंदिरों में पहुंचकर ग्रामीणों ने देवता की पूजा अर्चना की और प्रसाद भी ग्रहण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी क्षेत्र में जगह-जगह मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। क्षेत्र के देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने अपने-अपने आराध्य देवताओं के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। इस पर्व का प्रमुख आकर्षण ऐतिहासिक शमशरी महादेव मंदिर रहा, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान महादेव के दर्शन कर शीश नवाया। भक्तों को आशीर्वाद देने के बाद देवता शमशरी महादेव 17 दिन के स्वर्ग प्रवास के लिए प्रस्थान कर गए। अब मंदिर के कपाट अगले 17 दिनों तक बंद कर दिए गए हैं। मकर संक्रांति के दिन क्षेत्र में घी खिचड़ी पकाने की परंपरा भी पूरे विधि-विधान से निभाई गई। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने घर-घर घी खिचड़ी बनाकर देवताओं को अर्पित की। यह परंपरा पुण्य प्राप्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, जो सदियों से चली आ रही है। शमशरी महादेव मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जो अन्य दिनों से अलग होती है। यहां हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति और धार्मिक रीति-रिवाजों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। मकर संक्रांति के दिन कमांद गांव के ग्रामीणों ने भी विशेष धार्मिक परंपरा का पालन किया। ब्रह्म मुहूर्त में विशेष परंपरा का निर्वहन करते हुए कमांद के ग्रामीण शमशरी महादेव मंदिर पहुंचे और शिवलिंग पर घृत अर्पित कर पूजा-अर्चना की। संक्रांति की रस्म होते ही देवता अपने स्वर्ग प्रवास निकल गए। वहीं, आनी क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी मकर संक्रांति को भारी संख्या में लोग पहुंचे। मंदिरों में पहुंचकर ग्रामीणों ने देवता की पूजा अर्चना की और प्रसाद भी ग्रहण किया।