{"_id":"67a9dc059e9e40f32d0300d5","slug":"kurpan-river-nithar-flood-debris-threat-daropa-bailey-bridge-dattanagar-village-in-danger-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-129594-2025-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: बाढ़ के पत्थर, लकड़ी के मलबे से डरोपा बेली ब्रिज और दत्तनगर गांव को खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: बाढ़ के पत्थर, लकड़ी के मलबे से डरोपा बेली ब्रिज और दत्तनगर गांव को खतरा
विज्ञापन
कुर्पण खड्ड में बीते वर्ष आई बाढ़ के कारण सतलुज नदी किनारे जमा हुआ मलबा। संवाद
कुर्पण खड्ड में खतरे की घंटी बजा रहा जमा हुआ मलबा
वर्ष 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ के बाद बढ़ीं ग्रामीणों की दुश्वारियां
ग्रामीणों ने समय रहते प्रशासन से जमा हुए मलबे को उठाने की लगाई गुहार
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। डरोपा गांव और बेली ब्रिज के साथ जमा हुए मलबे से डरोपा बेली ब्रिज समेत दत्तनगर गांव के लिए खतरा पैदा हो गया है। 31 जुलाई, 2024 को कुर्पण खड्ड में बाढ़ आने से पत्थर और लकड़ी के मलबे के ढेर यहां जमा हो गए थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से जमा हुए मलबे को उठाने की गुहार लगाई है।
पिछले साल बाढ़ आने से कुर्पण खड्ड से सटे क्षेत्रों में भारी तबाही हुई थी। इस दौरान खड्ड पर बने छोटे-बड़े पुल बाढ़ में बह गए थे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आया मलबा, विशालकाय पत्थर, बड़े-बड़े पेड़ डरोपा बेली ब्रिज से लेकर सतलुज नदी तक जमा गए थे। उस दौरान बाढ़ का पानी दत्तनगर पुल तक और पुल के साथ के क्षेत्रों तक जलभराव की स्थिति पैदा हो हो गई थी। वहीं गड़ेज, देहरा, नित्थर, लोट और दुराह पंचायतों के लोगों की आवाजाही बंद हो गई थी और उन्हें लूहरी होकर अतिरिक्त सफर तयकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा था। गडेज पंचायत के प्रधान दारा सिंह कायथ सहित पंचायत के ग्रामीणों और दत्तनगर गांव के ओमप्रकाश, सुलेमान, श्याम सिंह, रमन कुमार, प्रभात और संजीव कुमार सहित कई अन्य ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले कुछ माह बाद फिर से बरसात आने वाली है। सतलुज नदी के साथ मलबा इतना ज्यादा है, जिससे पानी पीछे की तरफ आ सकता है। जलभराव की स्थिति फिर पैदा हो सकती है, जिससे दत्तनगर पुल समेत आसपास के क्षेत्रों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन को इस बारे में कई बार बताया गया है, लेकिन अभी तक कोई सुध नहीं ली गई है। इस मलबे से आगामी बरसात में खतरा पैदा हो सकता है।
इस समस्या को लेकर डिजास्टर के माध्यम से प्रपोजल तैयार कर भेज दिया है। उम्मीद है कि शीघ्र मलबा उठा लिया जाएगा। ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर किया जाएगा। - मनमोहन सिंह, एसडीएम निरमंड
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ के बाद बढ़ीं ग्रामीणों की दुश्वारियां
ग्रामीणों ने समय रहते प्रशासन से जमा हुए मलबे को उठाने की लगाई गुहार
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)। डरोपा गांव और बेली ब्रिज के साथ जमा हुए मलबे से डरोपा बेली ब्रिज समेत दत्तनगर गांव के लिए खतरा पैदा हो गया है। 31 जुलाई, 2024 को कुर्पण खड्ड में बाढ़ आने से पत्थर और लकड़ी के मलबे के ढेर यहां जमा हो गए थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से जमा हुए मलबे को उठाने की गुहार लगाई है।
पिछले साल बाढ़ आने से कुर्पण खड्ड से सटे क्षेत्रों में भारी तबाही हुई थी। इस दौरान खड्ड पर बने छोटे-बड़े पुल बाढ़ में बह गए थे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आया मलबा, विशालकाय पत्थर, बड़े-बड़े पेड़ डरोपा बेली ब्रिज से लेकर सतलुज नदी तक जमा गए थे। उस दौरान बाढ़ का पानी दत्तनगर पुल तक और पुल के साथ के क्षेत्रों तक जलभराव की स्थिति पैदा हो हो गई थी। वहीं गड़ेज, देहरा, नित्थर, लोट और दुराह पंचायतों के लोगों की आवाजाही बंद हो गई थी और उन्हें लूहरी होकर अतिरिक्त सफर तयकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा था। गडेज पंचायत के प्रधान दारा सिंह कायथ सहित पंचायत के ग्रामीणों और दत्तनगर गांव के ओमप्रकाश, सुलेमान, श्याम सिंह, रमन कुमार, प्रभात और संजीव कुमार सहित कई अन्य ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले कुछ माह बाद फिर से बरसात आने वाली है। सतलुज नदी के साथ मलबा इतना ज्यादा है, जिससे पानी पीछे की तरफ आ सकता है। जलभराव की स्थिति फिर पैदा हो सकती है, जिससे दत्तनगर पुल समेत आसपास के क्षेत्रों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन को इस बारे में कई बार बताया गया है, लेकिन अभी तक कोई सुध नहीं ली गई है। इस मलबे से आगामी बरसात में खतरा पैदा हो सकता है।
विज्ञापन
इस समस्या को लेकर डिजास्टर के माध्यम से प्रपोजल तैयार कर भेज दिया है। उम्मीद है कि शीघ्र मलबा उठा लिया जाएगा। ग्रामीणों की समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर किया जाएगा। - मनमोहन सिंह, एसडीएम निरमंड
विज्ञापन

कुर्पण खड्ड में बीते वर्ष आई बाढ़ के कारण सतलुज नदी किनारे जमा हुआ मलबा। संवाद