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Rampur Bushahar News: सूखे खेतों में तबाही के जख्म हरे, कोयल-बायल 2500 बीघा उपजाऊ भूमि सूखने के कगार पर
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कोयल गांव के लिए सिंचाई की सुविधा न होने के कारण सूखे की चपेट में आई जमीन। संवाद
2500 बीघा उपजाऊ भूमि सूखने के कगार पर
कोयल-बायल सिंचाई नहर टूटने के कारण बढ़ी किसानों की दुश्वारियां
बीते साल 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ से तबाह हुई कूहल
दो साल से बायल और कोयल गांव के हजारों किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। गड़ेच पंचायत के कोयल और बायल गांव के सूखने की कगार पर पहुंचे खेतों में बाढ़ की तबाही के जख्म एक साल बाद भी हरे हैं। कोयल-बायल सिंचाई नहर टूटने के कारण करीब 2500 उपजाऊ भूमि सूखने की कगार पर है। बिना नहर के हरे-भरे खेत कैसे लहलहाएंगे, इसको लेकर किसान चिंतित हैं। कुर्पण खड्ड से चलने वाली सिंचाई नहर बायल और कोयल के हजारों किसानों की खेती का एकमात्र सहारा है, जिससे 2500 बीघा से भी ज्यादा जमीन की सिंचाई की जाती है। बीते दो साल पहले आई भारी बरसात के चलते यह सिंचाई नहर कई जगह से टूट गई थी और जल शक्ति विभाग इस पर कार्य भी कर रहा था, लेकिन पिछले साल 31 जुलाई,2024 को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ ने इस सिंचाई कूहल फिर से भारी नुकसान पहुंचाया। ग्राम पंचायत गड़ेज की उपजाऊ भूमि (क्यार) पिछले दो साल से कुर्पण खड्ड में पानी न होने से सूख रही है।
गड़ेज पंचायत प्रधान दारा सिंह कायथ का कहना है कि बीते साल 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ और पिछले दो साल पहले आई भारी बरसात से सिंचाई की कूहल टूटी हुई है। इससे 2500 बीघा उपजाऊ क्यार, जिसमें गेहूं, धान, सेब की नर्सरी और सब्जी ग्रामीणों की आर्थिकी का मुख्य साधन है, लेकिन अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर है। इसे लेकर करीब तीन माह पहले रामपुर में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मिले थे, लेकिन स्थिति जस की तस है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द कूहल को जोड़ा जाएगा, लेकिन अभी तक हजारों किसान कुर्पण खड्ड के पानी का इंतजार कर रहे हैं कि कब पानी आएगा, कब हमारे खेत लहलहाएंगे। कोयल-बायल के क्यार से धान, गेहूं के उत्पादन से किसानों के पूरे परिवारों का भरण पोषण तो होता ही है, वहीं किसान बाजार में भी इसको बेचता है। उन्होंने शीघ्र सिंचाई नहर निर्माण की मांग उठाई है, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
प्रथम चरण का टेंडर इस कूहल का हो चुका है। कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा। कूहल का पांच सौ मीटर हिस्सा पूरी तरह से ढह गया है। इससे पहले तो यह निरंतर चली हुई थी।
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- किशोर शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग आनी
- संवाद
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कोयल-बायल सिंचाई नहर टूटने के कारण बढ़ी किसानों की दुश्वारियां
बीते साल 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ से तबाह हुई कूहल
दो साल से बायल और कोयल गांव के हजारों किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। गड़ेच पंचायत के कोयल और बायल गांव के सूखने की कगार पर पहुंचे खेतों में बाढ़ की तबाही के जख्म एक साल बाद भी हरे हैं। कोयल-बायल सिंचाई नहर टूटने के कारण करीब 2500 उपजाऊ भूमि सूखने की कगार पर है। बिना नहर के हरे-भरे खेत कैसे लहलहाएंगे, इसको लेकर किसान चिंतित हैं। कुर्पण खड्ड से चलने वाली सिंचाई नहर बायल और कोयल के हजारों किसानों की खेती का एकमात्र सहारा है, जिससे 2500 बीघा से भी ज्यादा जमीन की सिंचाई की जाती है। बीते दो साल पहले आई भारी बरसात के चलते यह सिंचाई नहर कई जगह से टूट गई थी और जल शक्ति विभाग इस पर कार्य भी कर रहा था, लेकिन पिछले साल 31 जुलाई,2024 को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ ने इस सिंचाई कूहल फिर से भारी नुकसान पहुंचाया। ग्राम पंचायत गड़ेज की उपजाऊ भूमि (क्यार) पिछले दो साल से कुर्पण खड्ड में पानी न होने से सूख रही है।
गड़ेज पंचायत प्रधान दारा सिंह कायथ का कहना है कि बीते साल 31 जुलाई को कुर्पण खड्ड में आई बाढ़ और पिछले दो साल पहले आई भारी बरसात से सिंचाई की कूहल टूटी हुई है। इससे 2500 बीघा उपजाऊ क्यार, जिसमें गेहूं, धान, सेब की नर्सरी और सब्जी ग्रामीणों की आर्थिकी का मुख्य साधन है, लेकिन अब पूरी तरह से खत्म होने की कगार पर है। इसे लेकर करीब तीन माह पहले रामपुर में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मिले थे, लेकिन स्थिति जस की तस है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द कूहल को जोड़ा जाएगा, लेकिन अभी तक हजारों किसान कुर्पण खड्ड के पानी का इंतजार कर रहे हैं कि कब पानी आएगा, कब हमारे खेत लहलहाएंगे। कोयल-बायल के क्यार से धान, गेहूं के उत्पादन से किसानों के पूरे परिवारों का भरण पोषण तो होता ही है, वहीं किसान बाजार में भी इसको बेचता है। उन्होंने शीघ्र सिंचाई नहर निर्माण की मांग उठाई है, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
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प्रथम चरण का टेंडर इस कूहल का हो चुका है। कार्य भी जल्द शुरू हो जाएगा। कूहल का पांच सौ मीटर हिस्सा पूरी तरह से ढह गया है। इससे पहले तो यह निरंतर चली हुई थी।
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- किशोर शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग आनी
- संवाद