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Rampur Bushahar News: ओलावृष्टि की मार, रोहड़ू-जुब्बल में सेब की फसल तबाह
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दस पंचायतों के बीस गांव प्रभावित, फूल-फल और टहनियां जमीन पर, कई बगीचे पूरी तरह उजड़े
हेल नेट तक टूटे, सरकार से मुआवजा और राहत पैकेज की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। शुक्रवार शाम को तेज ओलावृष्टि ने रोहडू और जुब्बल क्षेत्र की करीब दस पंचायतों के बीस गांवों में सेब बागवानों को गहरे संकट में डाल दिया। शनिवार सुबह जब बागवान बगीचों में पहुंचे तो पेड़ों पर लगे फूल, छोटे फल, पत्ते और टहनियां जमीन पर गिरी मिलीं। कई जगह हालात इतने खराब हैं कि खाने तक के लिए फल नहीं बचे हैं। कुछ ही मिनटों में सालभर की मेहनत तबाह हो गई। इससे बागवानों में मायूसी छा गई है।
जुब्बल तहसील की झाल्टा, गिल्टाड़ी, झगटान, मांदल और भोलाड़ पंचायतों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा चिड़गांव क्षेत्र की रोहल पंचायत, धगोली और आंध्रा भी ओलों की मार से अछूती नहीं रहीं। बागवानों का कहना है कि पहले से ही मौसम अनुकूल नहीं था और अब ओलावृष्टि ने पूरी फसल चौपट कर दी।
बागवानों के अनुसार संकट पिछले साल से ही जारी है। पतझड़ के दौरान नुकसान, सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण सूखे जैसे हालात बने रहे। इस बार भी मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फूल कम आए, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर फ्लावरिंग से उम्मीद जगी थी, लेकिन ओलों ने उन उम्मीदों को भी खत्म कर दिया।
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झाल्टा के एलआर चौहान, गिल्टाड़ी के प्रेम तनेटा, सुरेंद्र सिंह और राजेश कुमार ने बताया कि ओले इतने तेज थे कि पूरी फसल झड़ गई। कई जगह हेल नेट भी टूटकर जमीन पर गिर गए। उनका कहना है कि अब बगीचों में कुछ नहीं बचा और परिवार का पालन-पोषण करना भी चुनौती बन गया है।
बागवानों ने आरोप लगाया कि मंडी मध्यस्थता योजना के तहत पिछले साल बेचे सेब का भुगतान अब तक नहीं मिला है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई है। उन्होंने सरकार से तत्काल मुआवजा, लंबित भुगतान जारी करने और बगीचों को नुकसान से उबारने के लिए दवाइयां उपलब्ध कराने के साथ विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है।
एसडीएम जुब्बल गुरमीत नेगी ने कहा कि सूचना मिलते ही प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्रों में पटवारियों को भेजकर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के तहत सरकार को भेजा जाएगा।
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हेल नेट तक टूटे, सरकार से मुआवजा और राहत पैकेज की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। शुक्रवार शाम को तेज ओलावृष्टि ने रोहडू और जुब्बल क्षेत्र की करीब दस पंचायतों के बीस गांवों में सेब बागवानों को गहरे संकट में डाल दिया। शनिवार सुबह जब बागवान बगीचों में पहुंचे तो पेड़ों पर लगे फूल, छोटे फल, पत्ते और टहनियां जमीन पर गिरी मिलीं। कई जगह हालात इतने खराब हैं कि खाने तक के लिए फल नहीं बचे हैं। कुछ ही मिनटों में सालभर की मेहनत तबाह हो गई। इससे बागवानों में मायूसी छा गई है।
जुब्बल तहसील की झाल्टा, गिल्टाड़ी, झगटान, मांदल और भोलाड़ पंचायतों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा चिड़गांव क्षेत्र की रोहल पंचायत, धगोली और आंध्रा भी ओलों की मार से अछूती नहीं रहीं। बागवानों का कहना है कि पहले से ही मौसम अनुकूल नहीं था और अब ओलावृष्टि ने पूरी फसल चौपट कर दी।
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बागवानों के अनुसार संकट पिछले साल से ही जारी है। पतझड़ के दौरान नुकसान, सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण सूखे जैसे हालात बने रहे। इस बार भी मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फूल कम आए, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर फ्लावरिंग से उम्मीद जगी थी, लेकिन ओलों ने उन उम्मीदों को भी खत्म कर दिया।
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झाल्टा के एलआर चौहान, गिल्टाड़ी के प्रेम तनेटा, सुरेंद्र सिंह और राजेश कुमार ने बताया कि ओले इतने तेज थे कि पूरी फसल झड़ गई। कई जगह हेल नेट भी टूटकर जमीन पर गिर गए। उनका कहना है कि अब बगीचों में कुछ नहीं बचा और परिवार का पालन-पोषण करना भी चुनौती बन गया है।
बागवानों ने आरोप लगाया कि मंडी मध्यस्थता योजना के तहत पिछले साल बेचे सेब का भुगतान अब तक नहीं मिला है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई है। उन्होंने सरकार से तत्काल मुआवजा, लंबित भुगतान जारी करने और बगीचों को नुकसान से उबारने के लिए दवाइयां उपलब्ध कराने के साथ विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है।
एसडीएम जुब्बल गुरमीत नेगी ने कहा कि सूचना मिलते ही प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्रों में पटवारियों को भेजकर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद नियमों के तहत सरकार को भेजा जाएगा।