{"_id":"6269941a496d9455186a78bd","slug":"five-doctor-went-to-training-from-rekangpeo-hospital-rampur-hp-news-sml4070568120","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिकांगपिओ अस्पताल से प्रशिक्षण पर गए पांच विशेषज्ञ डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिकांगपिओ अस्पताल से प्रशिक्षण पर गए पांच विशेषज्ञ डॉक्टर
विज्ञापन
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल से एक साथ पांच डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए जाने से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को उपचार के लिए रामपुर, शिमला और चंडीगढ़ जाना पड़ रहा है। अस्पताल में पहले से ही कई विभागों में डॉक्टरों के पद खाली चल रहे हैं। यहां बाल रोग विशेषज्ञ का पद पिछले नौ सालों से खाली चल रहा है। इसके अतिरिक्त ईएनटी विभाग भी बिना डॉक्टर के हैं। इससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में अस्पताल से सेवाएं दे रहे पांच डॉक्टर रेजीडेंट फेलोशिप ट्रेनिंग के लिए शिमला चला गए हैं। इसमें दो रेडियोलॉजिस्ट और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर शामिल हैं। इससे जिले की हजारों की आबादी एक बार स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम हो गई है। जनजातीय जिला होने के कारण यहां से उपचार के लिए लोगों को कई सौ किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन परिस्थितियों में पेश आती है, जब किसी भी दुर्घटना या अन्य गंभीर मरीज को अस्पताल में लाया जाता है।
ऐसे में मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलने से जान को जोखिम बना रहता है। विशेषज्ञ नहीं होने से अस्पताल में करीब 59 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई कलर डोपलर अल्ट्रासाउंड मशीन फिर से धूल हांफ रही है। अस्पताल में आए मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. निहाल नेगी ने यहां तीन महीने ही सेवाएं दीं।
विज्ञापन
जरनल सर्जन डॉ. राजकुमार नेगी ने करीब साढे़ पांच साल, जरनल सर्जन डॉ. सुनील कुमार नेगी ढाई साल, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. डेन्कुअल ने करीब डेढ़ साल, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय ने पांच माह अस्पताल में सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त अस्पताल में अब मेडिसिन विशेषज्ञ, ऑर्थो चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ और ईएनएटी के डॉक्टर का पद खाली चल रहा है। जिले से सैकड़ों की संख्या में रोजाना मरीज उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ पहुंचते हैं लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों के खाली पदों के कारण उन्हें परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
जिले के 25 हजार बच्चे उपचार से महरूम
क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ पर जिले के हजारों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का भार है। हैरानी की बात है कि बीते नौ सालों से अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की नाकामी के चलते जिले के करीब 25 हजार बच्चों को उपचार के लिए दूसरे जिलों और राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है।
इनसेट
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोशनलाल ने कहा है कि पांच विशेषज्ञ डॉक्टर शिमला कोर्स करने के लिए चला गए हैं। खाली पदों को लेकर सरकार और विभागों के अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द अस्पताल के रिक्त पदों को भरा जाएगा।
विज्ञापन
रिकांगपिओ (किन्नौर)। क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल से एक साथ पांच डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए जाने से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को उपचार के लिए रामपुर, शिमला और चंडीगढ़ जाना पड़ रहा है। अस्पताल में पहले से ही कई विभागों में डॉक्टरों के पद खाली चल रहे हैं। यहां बाल रोग विशेषज्ञ का पद पिछले नौ सालों से खाली चल रहा है। इसके अतिरिक्त ईएनटी विभाग भी बिना डॉक्टर के हैं। इससे मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में अस्पताल से सेवाएं दे रहे पांच डॉक्टर रेजीडेंट फेलोशिप ट्रेनिंग के लिए शिमला चला गए हैं। इसमें दो रेडियोलॉजिस्ट और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर शामिल हैं। इससे जिले की हजारों की आबादी एक बार स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम हो गई है। जनजातीय जिला होने के कारण यहां से उपचार के लिए लोगों को कई सौ किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन परिस्थितियों में पेश आती है, जब किसी भी दुर्घटना या अन्य गंभीर मरीज को अस्पताल में लाया जाता है।
विज्ञापन
ऐसे में मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलने से जान को जोखिम बना रहता है। विशेषज्ञ नहीं होने से अस्पताल में करीब 59 लाख रुपये की लागत से स्थापित की गई कलर डोपलर अल्ट्रासाउंड मशीन फिर से धूल हांफ रही है। अस्पताल में आए मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. निहाल नेगी ने यहां तीन महीने ही सेवाएं दीं।
विज्ञापन
जरनल सर्जन डॉ. राजकुमार नेगी ने करीब साढे़ पांच साल, जरनल सर्जन डॉ. सुनील कुमार नेगी ढाई साल, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. डेन्कुअल ने करीब डेढ़ साल, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय ने पांच माह अस्पताल में सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त अस्पताल में अब मेडिसिन विशेषज्ञ, ऑर्थो चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ और ईएनएटी के डॉक्टर का पद खाली चल रहा है। जिले से सैकड़ों की संख्या में रोजाना मरीज उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ पहुंचते हैं लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों के खाली पदों के कारण उन्हें परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
जिले के 25 हजार बच्चे उपचार से महरूम
क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ पर जिले के हजारों लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का भार है। हैरानी की बात है कि बीते नौ सालों से अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो पाई है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की नाकामी के चलते जिले के करीब 25 हजार बच्चों को उपचार के लिए दूसरे जिलों और राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है।
इनसेट
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोशनलाल ने कहा है कि पांच विशेषज्ञ डॉक्टर शिमला कोर्स करने के लिए चला गए हैं। खाली पदों को लेकर सरकार और विभागों के अधिकारियों को लिखित रूप से सूचित किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द अस्पताल के रिक्त पदों को भरा जाएगा।