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शपथ पत्र और पावर ऑफ अटॉर्नी का शुल्क बढ़ाने का फैसला जनविरोधी : कौल सिंह

Mon, 07 Sep 2026 11:40 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:40 PM IST
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रामपुर बुशहर।
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भाजपा नेता कौल सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन 3 सितंबर को सदन में भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया गया, जिसमें शपथ पत्र का शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर सीधा 100 रुपये कर दिया गया है। साथ ही पावर ऑफ अटॉर्नी का शुल्क भी 1,000 से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। इसका नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और विपक्ष के भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला जनविरोधी है, क्योंकि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे गरीब लोग हैं जो बढ़ा हुआ शुल्क देने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बावजूद सुक्खू सरकार ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। उन्होंने कहा कि शपथ पत्र हर गरीब व्यक्ति के लिए जरूरी दस्तावेज है। चाहे जाति प्रमाणपत्र बनाना हो, आय प्रमाणपत्र, बोनाफाइड, पेंशन या नौकरी का काम हो। इसमें भारी बढ़ोतरी करके सरकार ने आम आदमी पर सीधा आर्थिक बोझ डाला है।
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