{"_id":"6900c9d863165ba13d0e0822","slug":"court-of-additional-chief-justice-family-court-kinnaur-at-rampur-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1031-146995-2025-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: पति को पत्नी और बेटी के भरण पोषण के लिए देने होंगे प्रतिमाह 7500 रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: पति को पत्नी और बेटी के भरण पोषण के लिए देने होंगे प्रतिमाह 7500 रुपये
विज्ञापन
पत्नी और बच्चों को भरण पोषण राशि देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है पति
पारिवारिक न्यायालय किन्नौर की अदालत ने याचिका की सुनवाई के दौरान की टिप्पणी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित अपर प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय किन्नौर की अदालत ने एक याचिका का निपटारा करते हुए व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह मायके में रही अपनी पत्नी और बेटी के भरण पोषण के लिए प्रतिमाह 7,500 रुपये देगा। पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर भरण पोषण भत्ता प्रदान कराने का अनुरोध किया था। पत्नी शिमला जिले की निवासी हैं। पत्नी की ओर से दायर याचिका के अनुसार उनका विवाह वर्ष 2020 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह से एक बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय तक दोनों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण रहे। इसके बाद पति का व्यवहार बदल गया। वह उसके साथ छोटी-छोटी बातों पर दुर्व्यवहार करने लगा और उसका उत्पीड़न करने लगा। वह उसे गुलाम की तरह मानने लगा और शराब के नशे में मारपीट करता था। इस व्यवहार के कारण उसे ससुराल घर छोड़कर मायके में शरण लेनी पड़ी, जहां अब बेटी के साथ रह रही है। उसके पास बेटी का भरण पोषण करने के लिए आय का कोई स्रोत नहीं है। दूसरी ओर पति एक स्वस्थ व्यक्ति है और बागवानी विशेषज्ञ है। वह प्रतिमाह 40 हजार रुपये अधिक कमाता है। आज तक उसने उसे और बेटी को कोई भरण पोषण भत्ता नहीं दिया है। याचिका को स्वीकार किया जाए और याचिकाकर्ताओं को 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण के रूप में प्रदान किया जाए। अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए टिप्पणी की है कि प्रतिवादी यानी पति याचिकाकर्ताओं का पति और पिता होने के नाते कानूनी और नैतिक रूप से उन्हें भरण पोषण राशि प्रदान करने के लिए बाध्य है। मामले की चर्चा को ध्यान में रखते हुए यह माना जाता है कि प्रतिवादी याचिकाकर्ताओं को भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों के साथ न्याय के हित में प्रतिवादी को याचिकाकर्ता पत्नी को 4,500 रुपये प्रति माह और बेटी को तीन हजार रुपये प्रति माह भरण पोषण राशि का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है।
विज्ञापन
पारिवारिक न्यायालय किन्नौर की अदालत ने याचिका की सुनवाई के दौरान की टिप्पणी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित अपर प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय किन्नौर की अदालत ने एक याचिका का निपटारा करते हुए व्यक्ति को आदेश दिया है कि वह मायके में रही अपनी पत्नी और बेटी के भरण पोषण के लिए प्रतिमाह 7,500 रुपये देगा। पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर भरण पोषण भत्ता प्रदान कराने का अनुरोध किया था। पत्नी शिमला जिले की निवासी हैं। पत्नी की ओर से दायर याचिका के अनुसार उनका विवाह वर्ष 2020 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह से एक बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय तक दोनों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण रहे। इसके बाद पति का व्यवहार बदल गया। वह उसके साथ छोटी-छोटी बातों पर दुर्व्यवहार करने लगा और उसका उत्पीड़न करने लगा। वह उसे गुलाम की तरह मानने लगा और शराब के नशे में मारपीट करता था। इस व्यवहार के कारण उसे ससुराल घर छोड़कर मायके में शरण लेनी पड़ी, जहां अब बेटी के साथ रह रही है। उसके पास बेटी का भरण पोषण करने के लिए आय का कोई स्रोत नहीं है। दूसरी ओर पति एक स्वस्थ व्यक्ति है और बागवानी विशेषज्ञ है। वह प्रतिमाह 40 हजार रुपये अधिक कमाता है। आज तक उसने उसे और बेटी को कोई भरण पोषण भत्ता नहीं दिया है। याचिका को स्वीकार किया जाए और याचिकाकर्ताओं को 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण के रूप में प्रदान किया जाए। अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए टिप्पणी की है कि प्रतिवादी यानी पति याचिकाकर्ताओं का पति और पिता होने के नाते कानूनी और नैतिक रूप से उन्हें भरण पोषण राशि प्रदान करने के लिए बाध्य है। मामले की चर्चा को ध्यान में रखते हुए यह माना जाता है कि प्रतिवादी याचिकाकर्ताओं को भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों के साथ न्याय के हित में प्रतिवादी को याचिकाकर्ता पत्नी को 4,500 रुपये प्रति माह और बेटी को तीन हजार रुपये प्रति माह भरण पोषण राशि का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है।