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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के मामले में दोषी को छह माह का कारावास
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अदालत ने 3.5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर ने चेक बाउंस के मामले में पवन कुमार को दोषी ठहराया है। अदालत ने छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पवन कुमार को शिकायतकर्ता भीम देव को 3.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। पवन कुमार पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मुकदमा चल रहा था। शिकायतकर्ता भीम देव ने आरोप लगाया था कि उन्होंने नवंबर-दिसंबर 2019 में पवन कुमार को पांच लाख रुपये दिए थे। भुगतान न होने पर पवन कुमार ने 25 अगस्त 2020 को पांच लाख रुपये का चेक जारी किया। वह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायत दर्ज हुई। अदालत ने पवन कुमार के खिलाफ आरोप तय किए। पवन कुमार ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना करने का दावा किया। शिकायतकर्ता के वकील ने आरोपी का अपराध साबित होने का तर्क दिया। बचाव पक्ष के वकील ने देनदारी से इन्कार किया। पवन कुमार ने बचाव में कहा कि उन्होंने केवल तीन लाख रुपये लिए थे और चेक सुरक्षा के उद्देश्य से दिया गया था। साथ ही पूरी राशि लौटाने का भी दावा किया। हालांकि, अदालत ने उनके बचाव को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं पाया। शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्हें दो लाख रुपये शिकायत दर्ज होने के बाद मिले थे। अदालत ने इस राशि को समायोजित करते हुए 3.50 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। अदालत ने कहा कि यह एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है, इसलिए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम लागू नहीं होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर ने चेक बाउंस के मामले में पवन कुमार को दोषी ठहराया है। अदालत ने छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पवन कुमार को शिकायतकर्ता भीम देव को 3.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। पवन कुमार पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मुकदमा चल रहा था। शिकायतकर्ता भीम देव ने आरोप लगाया था कि उन्होंने नवंबर-दिसंबर 2019 में पवन कुमार को पांच लाख रुपये दिए थे। भुगतान न होने पर पवन कुमार ने 25 अगस्त 2020 को पांच लाख रुपये का चेक जारी किया। वह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायत दर्ज हुई। अदालत ने पवन कुमार के खिलाफ आरोप तय किए। पवन कुमार ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना करने का दावा किया। शिकायतकर्ता के वकील ने आरोपी का अपराध साबित होने का तर्क दिया। बचाव पक्ष के वकील ने देनदारी से इन्कार किया। पवन कुमार ने बचाव में कहा कि उन्होंने केवल तीन लाख रुपये लिए थे और चेक सुरक्षा के उद्देश्य से दिया गया था। साथ ही पूरी राशि लौटाने का भी दावा किया। हालांकि, अदालत ने उनके बचाव को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं पाया। शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्हें दो लाख रुपये शिकायत दर्ज होने के बाद मिले थे। अदालत ने इस राशि को समायोजित करते हुए 3.50 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। अदालत ने कहा कि यह एक सामाजिक-आर्थिक अपराध है, इसलिए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम लागू नहीं होगा।