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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Benefit of doubt to driver in hit-and-run death case

Rampur Bushahar News: हादसे में मौत के मामले में चालक को संदेह का लाभ, अदालत ने किया बरी

Wed, 21 Oct 2026 11:03 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:03 PM IST
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प्रत्यक्षदर्शियों ने चालक की पहचान नहीं की, अभियोजन आरोप साबित करने में रहा नाकाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर की अदालत ने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के घायल होने के मामले में आरोपी देवेंद्र को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष अदालत में यह साबित नहीं कर पाया कि हादसे के समय वाहन आरोपी चला रहा था और दुर्घटना उसकी लापरवाही से हुई थी। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 304-ए तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 181 और 196 के तहत लगे आरोपों से मुक्त कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अभियोजन के अनुसार, 24 सितंबर 2014 को खलोत में एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क से नीचे गिर गई थी। हादसे में देवेंद्र घायल हो गया, जबकि रमेश कुमार की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लिया और जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए। इनमें चार गवाहों ने दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंचने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने संबंधी बयान दिए। हालांकि, किसी भी गवाह ने अदालत में यह पुष्टि नहीं की कि दुर्घटना के समय वाहन देवेंद्र चला रहा था। एक गवाह ने आरोपी की लापरवाही से हादसा होने की बात से भी इन्कार किया। जांच अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उसे आरोपी के वाहन चलाने की जानकारी दी थी। हालांकि, संबंधित गवाहों ने अदालत में इसकी पुष्टि नहीं की। अदालत ने माना कि जांच अधिकारी के बयान को अन्य साक्ष्यों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। अदालत के अनुसार, आरोपी के वाहन चलाने और दुर्घटना उसकी तेज एवं लापरवाही से वाहन चलाने के कारण होने का आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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