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Rampur Bushahar News: सेब बगीचे में बढ़ा बीटल कीट का प्रकोप पत्तियां चटकर पौधों को पहुंचा रहे नुकसान
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सेब के पेड़ों की प्रकाश संश्लेक्षण प्रक्रिया हो रही प्रभावित, फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी पड़ेगा प्रभाव
विशेषज्ञों ने बगीचों में लाइट ट्रैप लगाने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई ( रोहड़ू)।
क्षेत्र के सेब बगीचों में इन दिनों बीटल कीट के बढ़ते प्रकोप से बागवान चिंतित हैं। पिछले एक-दो वर्षों से इन कीटों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है और रात के समय बड़ी संख्या में ये सेब के पौधों पर हमला कर पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे पौधों के विकास के साथ-साथ फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। बागवानों के अनुसार दिन के समय इन कीटों की गतिविधि कम दिखाई देती है, लेकिन अंधेरा होते ही ये बड़ी संख्या में पौधों पर सक्रिय हो जाते हैं। बीटल कीट पत्तियों को चटकर क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार, फल के आकार और गुणवत्ता पर पड़ता है। बागवानों का कहना है कि यदि समय रहते इन कीटों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
उद्यान विकास अधिकारी कोटखाई नवीन चलैन ने बताया कि बीटल कीट मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय होते हैं, इसलिए रात में स्प्रे करना व्यावहारिक और प्रभावी उपाय नहीं माना जाता। उन्होंने बागवानों को बगीचों में लाइट ट्रैप लगाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक ट्रैप के ऊपर बल्ब या अन्य प्रकाश स्रोत लगाया जाए तथा उसके नीचे पानी से भरे टब में उपयुक्त दवा मिलाई जाए। रात के समय प्रकाश से आकर्षित होकर बीटल कीट ट्रैप से टकराकर पानी में गिर जाते हैं, जिससे उनकी संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नवीन चलैन ने कहा कि इस तकनीक के माध्यम से लगभग 80 प्रतिशत तक कीटों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने बागवानों से बगीचों की नियमित निगरानी करने तथा समय रहते आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने का आह्वान किया, ताकि सेब की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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विशेषज्ञों ने बगीचों में लाइट ट्रैप लगाने की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई ( रोहड़ू)।
क्षेत्र के सेब बगीचों में इन दिनों बीटल कीट के बढ़ते प्रकोप से बागवान चिंतित हैं। पिछले एक-दो वर्षों से इन कीटों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है और रात के समय बड़ी संख्या में ये सेब के पौधों पर हमला कर पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे पौधों के विकास के साथ-साथ फल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। बागवानों के अनुसार दिन के समय इन कीटों की गतिविधि कम दिखाई देती है, लेकिन अंधेरा होते ही ये बड़ी संख्या में पौधों पर सक्रिय हो जाते हैं। बीटल कीट पत्तियों को चटकर क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार, फल के आकार और गुणवत्ता पर पड़ता है। बागवानों का कहना है कि यदि समय रहते इन कीटों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
उद्यान विकास अधिकारी कोटखाई नवीन चलैन ने बताया कि बीटल कीट मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय होते हैं, इसलिए रात में स्प्रे करना व्यावहारिक और प्रभावी उपाय नहीं माना जाता। उन्होंने बागवानों को बगीचों में लाइट ट्रैप लगाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक ट्रैप के ऊपर बल्ब या अन्य प्रकाश स्रोत लगाया जाए तथा उसके नीचे पानी से भरे टब में उपयुक्त दवा मिलाई जाए। रात के समय प्रकाश से आकर्षित होकर बीटल कीट ट्रैप से टकराकर पानी में गिर जाते हैं, जिससे उनकी संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नवीन चलैन ने कहा कि इस तकनीक के माध्यम से लगभग 80 प्रतिशत तक कीटों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने बागवानों से बगीचों की नियमित निगरानी करने तथा समय रहते आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने का आह्वान किया, ताकि सेब की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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