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Rampur Bushahar News: सेब सीजन ने पकड़ी रफ्तार, मंडियों में नहीं मिल रहे खरीदार
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लगातार गिर रहे दाम, एक सप्ताह में एक हजार रुपये पेटी कम हुई कीमत
चार से पांच लाख पेटियां बगीचाें से बाजार में पहुंचनी शुरू
एक सप्ताह पहले तीन हजार रुपये तक मिल रहे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब सीजन रफ्तार पकड़ रहा है और मंडियों में सेब के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। वहीं, सेब के दाम भी गिरते जा रहे हैं। एक सप्ताह में एक हजार रुपये तक सेब की प्रति पेटी दाम में कटौती हो चुकी है। बीते सोमवार से आज तक सात दिन में पूरे उत्तर भारत की मंडियोंं में एक हजार रुपये प्रति पेटी सेब के दाम गिर चुके हैं। हर दिन चार से पांच लाख पेटियां बगीचाें से बाजार में पहुंचनी शुरू हो चुकी हैं। पूरे उत्तर भारत की मंडियों में सेब की पहुंच लगातार बढ़ रही है, लेकिन खरीदार कम मिल रहे हैं। सेब बाहुल क्षेत्र में अभी तक निजी कंपनियों ने भी फलों की खरीद शुरू नहीं की है। मंडियों में अधिक सेब पहुंचने के कारण सेब के अधिकतम दाम अब दो हजार रुपये तक पहुंच चुके है, जबकि उसी किस्म के सेब का दाम एक सप्ताह पहले तीन हजार रुपये तक बागवानों को मिल रहा था। हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की मंडियों में लगातार सेब के दाम गिर चुके हैं।
सरकार को पहल करनी चाहिए
सेब के दाम में लगातार गिरावट के कारण बागवान परेशान हैं। बागवान सुशील चौहान का कहना है कि अब स्टोर की गुणवत्ता वाला सेब शुरू हो चुका है। इसलिए आढ़तियों, खरीदारों, प्राइवेट कंपनियों की मिली-भगत से सेब के दाम कम हो चुके है, ताकि कम दाम पर वे अपने पिछले साल स्टोर किए सेब के नुकसान की भरपाई कर सकें। बागवान विरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार को इस ओर पहल करनी चाहिए। बाजार में डिमांड सप्लाई का संतुलन बनाए रखने के लिए नीति बनाने की जरूरत है। इस साल कम पैदावार के बाद बागवान मंडियों में लुट रहे है। इसके लिए किसान संगठनों को भी पहल करने की जरूरत है। इस बार पहली बार कई मंडियोंं में सेब के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
कच्चे फल बाजार में पहुंचाने में जल्दबाजी न करें
बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंंद्र के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि हर साल एक सात प्रति पेटी सेब का दाम कम होना चिंताजनक है। बाजार में दाम डिमांड सप्लाई पर निर्भर रहते हैं। एक सप्ताह में सेब का दाम एक हजार रुपये प्रति पेटी कम होना संशय पैदा कर रहा है। इस पर सरकार को निगरानी की जरूरत है। उन्होंने बागवानों से भी आग्रह किया कि सेब के कच्चे फल बाजार में पहुंचाने में जल्दबाजी न करें।
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चार से पांच लाख पेटियां बगीचाें से बाजार में पहुंचनी शुरू
एक सप्ताह पहले तीन हजार रुपये तक मिल रहे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब सीजन रफ्तार पकड़ रहा है और मंडियों में सेब के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। वहीं, सेब के दाम भी गिरते जा रहे हैं। एक सप्ताह में एक हजार रुपये तक सेब की प्रति पेटी दाम में कटौती हो चुकी है। बीते सोमवार से आज तक सात दिन में पूरे उत्तर भारत की मंडियोंं में एक हजार रुपये प्रति पेटी सेब के दाम गिर चुके हैं। हर दिन चार से पांच लाख पेटियां बगीचाें से बाजार में पहुंचनी शुरू हो चुकी हैं। पूरे उत्तर भारत की मंडियों में सेब की पहुंच लगातार बढ़ रही है, लेकिन खरीदार कम मिल रहे हैं। सेब बाहुल क्षेत्र में अभी तक निजी कंपनियों ने भी फलों की खरीद शुरू नहीं की है। मंडियों में अधिक सेब पहुंचने के कारण सेब के अधिकतम दाम अब दो हजार रुपये तक पहुंच चुके है, जबकि उसी किस्म के सेब का दाम एक सप्ताह पहले तीन हजार रुपये तक बागवानों को मिल रहा था। हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की मंडियों में लगातार सेब के दाम गिर चुके हैं।
सरकार को पहल करनी चाहिए
सेब के दाम में लगातार गिरावट के कारण बागवान परेशान हैं। बागवान सुशील चौहान का कहना है कि अब स्टोर की गुणवत्ता वाला सेब शुरू हो चुका है। इसलिए आढ़तियों, खरीदारों, प्राइवेट कंपनियों की मिली-भगत से सेब के दाम कम हो चुके है, ताकि कम दाम पर वे अपने पिछले साल स्टोर किए सेब के नुकसान की भरपाई कर सकें। बागवान विरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार को इस ओर पहल करनी चाहिए। बाजार में डिमांड सप्लाई का संतुलन बनाए रखने के लिए नीति बनाने की जरूरत है। इस साल कम पैदावार के बाद बागवान मंडियों में लुट रहे है। इसके लिए किसान संगठनों को भी पहल करने की जरूरत है। इस बार पहली बार कई मंडियोंं में सेब के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
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कच्चे फल बाजार में पहुंचाने में जल्दबाजी न करें
बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंंद्र के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि हर साल एक सात प्रति पेटी सेब का दाम कम होना चिंताजनक है। बाजार में दाम डिमांड सप्लाई पर निर्भर रहते हैं। एक सप्ताह में सेब का दाम एक हजार रुपये प्रति पेटी कम होना संशय पैदा कर रहा है। इस पर सरकार को निगरानी की जरूरत है। उन्होंने बागवानों से भी आग्रह किया कि सेब के कच्चे फल बाजार में पहुंचाने में जल्दबाजी न करें।
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