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Rampur Bushahar News: पराला मंडी में गाला 330, टाइडमैन 250 रुपये प्रति किलो बिका
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पराला फल मंडी में पहुंची सेब की सफल। संवाद
उत्पादन कम होने के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाले सेब को मिल रहे रिकॉर्ड दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी फल मंडी पराला में सेब सीजन की शुरुआत बागवानों के लिए उत्साहजनक रही है। प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन कम होने के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाले सेब को रिकॉर्ड दाम मिल रहे हैं। गाला सेब 330 रुपये प्रतिकिलो और टाइडमैन सेब 250 रुपये प्रतिकिलो तक बिका है। इन बेहतर कीमतों से बागवानों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। सोमवार को कोटगढ़ के बागवान कपूर जिष्ठू के डार्क बैरन गाला सेब की 20 पेटियों का एक लॉट 2,600 रुपये प्रति 10 किलोग्राम पेटी के भाव बिका। यह गाला सेब लगभग 260 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा गया। जिष्ठू ने बताया कि कम ऊंचाई पर भी उच्च तकनीक से बेहतर गुणवत्ता की फसल ली जा सकती है। उन्होंने अपनी कुछ पेटियों को 300 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने के बावजूद कुल फसल एक भाव में बेचने का फैसला किया। पराला मंडी में गाला की उत्कृष्ट गुणवत्ता को 330 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला है। टाइडमैन किस्म के सेब को भी 250 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला। एक दिन पहले कोटखाई के एक बागवान का गाला सेब 3300 रुपये प्रति 10 किलो पेटी बिका था। यह पिछले वर्ष के अधिकतम भाव 2400 रुपये प्रति पेटी से काफी अधिक है। बागवानों का कहना है कि यदि पूरे सीजन में ऐसे ही दाम मिलते रहे, तो कम उत्पादन के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। पराला फल मंडी में इस समय 40 आढ़ती सक्रिय रूप से कारोबार कर रहे हैं। मंडी में कुल 93 दुकानें हैं। सेब सीजन धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है और प्रतिदिन फलों की आवक बढ़ रही है। अभी तक मंडी में सेब की 9,883 पेटियां बिक्री के लिए पहुंच चुकी हैं। कारोबारियों का मानना है कि अगले दो सप्ताह में आवक कई गुना बढ़ जाएगी।
अन्य फलों को भी मिले अच्छे दाम
इस बार नाशपाती की फसल भी बागवानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है। मोटी डंडी नाशपाती को 170 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला है। अभी तक 6,719 पेटियां नाशपाती की मंडी पहुंच चुकी हैं। प्लम के दाम 25 रुपये से 175 रुपये प्रति किलो तक रहे हैं। चेरी को 250 से 400 रुपये प्रति किलो तक के दाम मिले हैं। खुमानी और आड़ू को भी अच्छे भाव मिले हैं।
गुणवत्ता पर जोर, बादाम को नुकसान
फल व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाजार में मात्रा से अधिक गुणवत्ता को प्राथमिकता मिल रही है। अच्छी रंगत, आकार और बेहतर पैकिंग वाले सेब को लगातार ऊंचे दाम मिल रहे हैं। यदि मौसम अनुकूल रहा और बाजार में मांग बनी रही, तो आने वाले दिनों में और भी बेहतर भाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, बादाम की फसल इस वर्ष मौसम की मार से लगभग चौपट हो गई है। उत्पादन कम होने से बादाम उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)।
हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी फल मंडी पराला में सेब सीजन की शुरुआत बागवानों के लिए उत्साहजनक रही है। प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन कम होने के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाले सेब को रिकॉर्ड दाम मिल रहे हैं। गाला सेब 330 रुपये प्रतिकिलो और टाइडमैन सेब 250 रुपये प्रतिकिलो तक बिका है। इन बेहतर कीमतों से बागवानों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। सोमवार को कोटगढ़ के बागवान कपूर जिष्ठू के डार्क बैरन गाला सेब की 20 पेटियों का एक लॉट 2,600 रुपये प्रति 10 किलोग्राम पेटी के भाव बिका। यह गाला सेब लगभग 260 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा गया। जिष्ठू ने बताया कि कम ऊंचाई पर भी उच्च तकनीक से बेहतर गुणवत्ता की फसल ली जा सकती है। उन्होंने अपनी कुछ पेटियों को 300 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने के बावजूद कुल फसल एक भाव में बेचने का फैसला किया। पराला मंडी में गाला की उत्कृष्ट गुणवत्ता को 330 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला है। टाइडमैन किस्म के सेब को भी 250 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला। एक दिन पहले कोटखाई के एक बागवान का गाला सेब 3300 रुपये प्रति 10 किलो पेटी बिका था। यह पिछले वर्ष के अधिकतम भाव 2400 रुपये प्रति पेटी से काफी अधिक है। बागवानों का कहना है कि यदि पूरे सीजन में ऐसे ही दाम मिलते रहे, तो कम उत्पादन के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। पराला फल मंडी में इस समय 40 आढ़ती सक्रिय रूप से कारोबार कर रहे हैं। मंडी में कुल 93 दुकानें हैं। सेब सीजन धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है और प्रतिदिन फलों की आवक बढ़ रही है। अभी तक मंडी में सेब की 9,883 पेटियां बिक्री के लिए पहुंच चुकी हैं। कारोबारियों का मानना है कि अगले दो सप्ताह में आवक कई गुना बढ़ जाएगी।
अन्य फलों को भी मिले अच्छे दाम
इस बार नाशपाती की फसल भी बागवानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रही है। मोटी डंडी नाशपाती को 170 रुपये प्रतिकिलो तक का भाव मिला है। अभी तक 6,719 पेटियां नाशपाती की मंडी पहुंच चुकी हैं। प्लम के दाम 25 रुपये से 175 रुपये प्रति किलो तक रहे हैं। चेरी को 250 से 400 रुपये प्रति किलो तक के दाम मिले हैं। खुमानी और आड़ू को भी अच्छे भाव मिले हैं।
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गुणवत्ता पर जोर, बादाम को नुकसान
फल व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाजार में मात्रा से अधिक गुणवत्ता को प्राथमिकता मिल रही है। अच्छी रंगत, आकार और बेहतर पैकिंग वाले सेब को लगातार ऊंचे दाम मिल रहे हैं। यदि मौसम अनुकूल रहा और बाजार में मांग बनी रही, तो आने वाले दिनों में और भी बेहतर भाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, बादाम की फसल इस वर्ष मौसम की मार से लगभग चौपट हो गई है। उत्पादन कम होने से बादाम उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
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