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Rampur Bushahar News: बाजार में बिक रहे चौपाटिया पेस्ट की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

Tue, 25 Nov 2025 11:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 11:46 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहड़ू। बाजार में बिकने वाले चौपाटिया पेस्ट की गुणवत्ता को लेकर बागवानों ने फिर बागवानी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। बाजार से कच्चा माल खरीद कर इस पेस्ट को बनाने में 400 रुपये प्रति किलो खर्च आ रहा है। इसी के नाम पर बाजार में 150 रुपये प्रति किलो पैकिंग के साथ उपलब्ध हो रहा है। बागवानों ने सरकार से मांग की है कि इस प्रकार दवाइयों के नाम पर बिकने वाले उत्पाद की गुणवत्ता जांच करने की सरकार को पहल की जरूरत है। सेब के बागीचों में प्रूनिंग के दौरान कटे भाग पर विशेषज्ञ चौपाटिया पेस्ट लगाने की सिफारिश करते हैं। हर साल सेब बहुल क्षेत्र मेंं इसकी नवंबर से फरवरी के बीच भारी मांग रहती है। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी की सिफारिशों के आधार पर इसमें कॉपर कार्बोनेट, अलसी का तेल, लाल सीसा ऑक्साइड और नीम का तेल मिलाकर बनाया जाता है। बागवानी विश्वविद्यालय सिफारिशों के आधार पर तैयार पेस्ट की लागत 400 रुपये प्रति किलो कम से कम आती है, लेकिन बाजार में बिकने वाले पेस्ट के डिब्बों के बाद भी इन सभी तत्वों के नाम जरूर लिखे जाते हैं, पर दाम तीस प्रतिशत तक कम हैं। बागवान सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि उन्होंने पिछले साल बाजार से बना बनाया चौपाटिया पेस्ट खरीब कर बगीचे में इस्तेमाल किया। पौधों में घाव पर जहां पेस्ट लगाया, वहां फंगस का असर तो कम नहीं हुआ, लेकिन वहां पौधे की छाल को जरूर नुकसान पहुंचा है। इसलिए इस साल वह स्वयं अपने घर पर कच्चा माल लेकर पेस्ट तैयार करेंगे।
बाजार से कॉपर कार्बोनेट, रेड लेड ऑक्साइड और अलसी का तेल मिलाकर बागवान स्वयं चौपाटिया पेस्ट तैयार कर सकते हैं। पौधों का जख्म बड़ा हो या शाखा तने से उखड़ गई हो, तो बागवान गोबर और चिकनी मिट्टी के साथ फंगस को नष्ट करने वाले दवाइयाें को मिला कर बने पेस्ट को लगाकर भी नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। प्रूनिंग के बाद पौधों में बोडो मिक्चर की स्प्रे फंगस को नष्ट करने के लिए बहुत लाभदायक है। -- डाॅ. नरेंद्र कायथ,
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बागवानी विशेषज्ञ
--- सेब के नाम पर बिकने वाले हर उत्पाद को प्रमाणित करने की सख्त जरूरत है। प्रमाणित होने के बाद भी इसके समय समय पर सैंपल भरे जाने चाहिए ताकि बाजार में डुप्लीकेट न उतर सके। कभी दवाइयों की गुणवत्ता पर तो कभी सेब के पेस्ट को लेकर सवाल उठना बागवानी व बागवानों के लिए घातक है। सरकार ऐसे मामलों को गंभीरता से ले ताकि बागवानी को बचाया जा सके। - हरीश चौहान, अध्यक्ष संयुक्त किसान मंच
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