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बारिश के बाद मार्सोनिना और अल्टर्नेरिया की चपेट में आए सेब के बगीचे
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सेब की पत्तियों में फैल रही बीमारी से संक्रमित पत्तों को दिखाता बागवान
- फोटो : RAMPUR-HP
रतन चौहान
रोहडू़। तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश सेब के आकार को विकसित करने के लिए अनुकूल मानी जा रहा वहीं दूसरी ओर इससे सेब के बगीचे आल्टर्नेरिया और मार्सोनिना कोरोनिया रोग की चपेट में आ गए हैं। इससे समय से पूर्व ही पतझड़ का खतरा बढ़ गया है। लगातार हो रही वर्षा के कारण रोग अधिक तेजी से पनप रहा है।
रोग के अधिक फैलने से आने वाली फसल पर भी इसका विपरीत असर देखने को मिलेगा। इसको देखते हुए बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे रोहडू़ उपमंडल में होने वाले करोड़ों की सेब की फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। अभी तक बागवानी विशेषज्ञों के पास रोग फैलने के कई मामले आ चुके हैं। इसको देखते हुए उन्होंने बागवानों को आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी है।
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक छाया और अधिक नमी वाले बागीचों में बीमारी का प्रकोप अधिक दिखाई दे रहा है। शुरूआती चरण में रोग सेब की पत्तियों पर दिखाई दे रहा है। इससे ग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर गोलाकार गहरे हरे और पीले रंग के धब्बे नजर आते हैं। यह धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं।
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पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का होता जाता है। रोग के पनपने से समय से पूर्व ही पतझड़ होता है। इस फंगस के संक्रमण का फलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संक्रमित फलों पर भी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। अधिक पतझड़ होने पर फलों का विकास भी रुक जाता है। अधिक वर्षा, नमी और तापमान में गिरावट के कारण रोग तेजी से फैलता है।
इनसेट
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि अधिक नमी वाले सेब के बगीचों से आल्टर्नेरिया रोग के लक्षण मिलने शुरू हो गए हैं। बागवानों को विभाग की ओर से जारी की स्प्रे सारिणी के अनुसार दवाइयों का बगीचों में निर्धारित समय के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए।
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रोहडू़। तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश सेब के आकार को विकसित करने के लिए अनुकूल मानी जा रहा वहीं दूसरी ओर इससे सेब के बगीचे आल्टर्नेरिया और मार्सोनिना कोरोनिया रोग की चपेट में आ गए हैं। इससे समय से पूर्व ही पतझड़ का खतरा बढ़ गया है। लगातार हो रही वर्षा के कारण रोग अधिक तेजी से पनप रहा है।
रोग के अधिक फैलने से आने वाली फसल पर भी इसका विपरीत असर देखने को मिलेगा। इसको देखते हुए बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे रोहडू़ उपमंडल में होने वाले करोड़ों की सेब की फसल पर संकट के बादल छा गए हैं। अभी तक बागवानी विशेषज्ञों के पास रोग फैलने के कई मामले आ चुके हैं। इसको देखते हुए उन्होंने बागवानों को आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी है।
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बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक छाया और अधिक नमी वाले बागीचों में बीमारी का प्रकोप अधिक दिखाई दे रहा है। शुरूआती चरण में रोग सेब की पत्तियों पर दिखाई दे रहा है। इससे ग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर गोलाकार गहरे हरे और पीले रंग के धब्बे नजर आते हैं। यह धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं।
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पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का होता जाता है। रोग के पनपने से समय से पूर्व ही पतझड़ होता है। इस फंगस के संक्रमण का फलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संक्रमित फलों पर भी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। अधिक पतझड़ होने पर फलों का विकास भी रुक जाता है। अधिक वर्षा, नमी और तापमान में गिरावट के कारण रोग तेजी से फैलता है।
इनसेट
कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि अधिक नमी वाले सेब के बगीचों से आल्टर्नेरिया रोग के लक्षण मिलने शुरू हो गए हैं। बागवानों को विभाग की ओर से जारी की स्प्रे सारिणी के अनुसार दवाइयों का बगीचों में निर्धारित समय के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए।