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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Anti-Hailgun, which was started in 2011 at three places in Rohru, has not been expanded till date

Rampur Bushahar News: सेब की सुरक्षा कवच पर उपेक्षा का दंश

Thu, 02 Apr 2026 11:28 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 11:28 PM IST
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. रोहड़ू में तीन जगह वर्ष 2011 में शुरू हुए एंटी हेलगन का आज तक नहीं हुआ विस्तार
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. रडार खराब होने से मैनुअल ही चलाई जा रही एंटी हेलगन
संवाद न्यूज एजेंसी



रोहड़ू।
सेब के बगीचों को ओलावृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 2011 में तीन जगह एंटी हेलगन मशीन स्थापित की गईं, लेकिन सेब का यह सुरक्षा कवच राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। खड़ापत्थर में एंटी हेलगन मशीनों की रडार खराब पड़ी है। इस कारण ये मशीनें ऑटोमेटिक रूप से नहीं चल रहीं। इस गन के पास तैनात कर्मचारी मैनुअल एंटी हेलगन मशीन को चला रहे हैं। सेब की फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए 14 वर्ष पहले शुरू किए गए प्रोजेक्ट का आज तक विस्तार नहीं हो पाया। एंटी हेलगन प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में तत्कालीन बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने 2.89 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया था। प्रोजेक्ट के तहत जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र के बटाड़गलू, बड़ैंओघाट और देवरीघाट में तीन एंटी हेलगन मशीनें स्थापित की थीं। इन मशीनों का चलाने के लिए खड़ापत्थर में एक रडार डिवाइस कंट्रोल रूम स्थापित किया था। ओलावृष्टि की आशंका होने पर रडार से संकेत मिलते ही एंटी हेलगन मशीनें ऑटोमेटिक चलती थीं, लेकिन रडार कई वर्षों से खराब पड़ा है। इसे ठीक करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए गए। बटाड़गलु में स्थित हेलगन मशीन को चलाया ही नहीं जा रहा है। वहीं, देवरीघाट और बड़ैंओघाट में लगी गनों को रडार के अभाव में उद्यान विभाग की ओर से अंदाजे में मैनुअल चलाया जा रहा है। दिन के समय तो गन को अंदाजे में जैसे-तैसे चलाया जाता है, लेकिन देर रात ओलावृष्टि को रोकने के लिए गन मशीनें नहीं चल पातीं। सवाल यह उठता है कि यदि एंटी हेलगन ओलावृष्टि को रोकने में सफल रही, तो खराब रडार को ठीक क्यों नहीं किया गया। परीक्षण के तौर पर लगी गन का विस्तार क्यों नहीं किया गया। यदि हेलगन कारगर नहीं है, तो उसे चलाया क्यों जा रहा है।
ऐसे काम करती है एंटी हेलगन
एंटी हेलगन से एलपीजी और हवा के मिश्रण को हल्के विस्फोट के साथ आसमान में फायर किया जाता है। इस विस्फोट के कारण एक शॉक वेव तैयार होती है। यह शॉक वेव एंटी हेलगन के माध्यम से वायुमंडल में जाती है और बादलों के अंदर का तापमान बढ़ा देती है। इससे ओला बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। साथ ही बादल भी छंट जाते हैं।
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बटाड़गलु में एंटी हेलगन मशीन लंबे समय से बंद है। बड़ेओंघाट में लगी मशीन को दो दिन पहले चलाना शुरू कर दिया गया है। रडार लंबे समय से खराब है। - डाॅ. सुनील दत्त शर्मा, विषय वाद विशेषज्ञ, उद्यान विभाग कोटखाई
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देवरीघाट में लगी एंटी हेलगन को नियमित रूप से चलाया जा रहा है। ओलावृष्टि के दौरान बगीचों की फसल को बचाने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। - डॉ. अश्वनी चौहान,
विषय वाद विशेषज्ञ, उद्यान विभाग रोहड़ू
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