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वन भूमि के अतिक्रमण पर चार दोषी
Rampur
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:34 AM IST
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जुब्बल (शिमला)। वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब के बागीचे लगाने के तीन मामलों में जेएमआईसी प्रथम श्रेणी जुब्बल ने चार व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने अतिक्रमण छोड़कर भूमि को वन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय में मामले की पैरवी जिला सहायक न्यायवादी भैरव सिंह नेगी ने की।
वन विभाग ने जुब्बल के कठासु निवासी बंसी लाल, जाचली निवासी धर्म सिंह, खड़ापत्थर के कंवर सिंह व बहादुर सिंह के खिलाफ वन भूमि पर अतिक्रमण करने का मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया था। आईपीसी की धारा 447 व वन अधिनियम की धारा 33 के तहत मामला दर्ज किया गया था। न्यायालय के आदेशों के बाद वर्ष 2011-12 में भूमि की निशानदेही करवाई गई, जिसमें मौके पर अतिक्रमण पाया गया है। शुक्रवार को जेएमआईसी प्रथम श्रेणी जुब्बल धीरु ठाकुर की अदालत ने अतिक्रमण के तीनों मामलों में चार व्यक्तियाें को दोषी ठहराया है। तीनों मामले में दस दस बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब के बागीचे तैयार किए गए हैं। न्यायालय ने भूमि को खाली कर वन विभाग को सौंपने के आदेश दिए हैं। दोषियों की सजा पर बीस अक्तूबर के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
इसकी जानकारी मामले की पैरवी कर रहे जिला सहायक न्यायवादी भैरव सिंह नेगी ने दी। उन्हाेंने कहा कि अतिक्रमण के तीन मामलों में चार व्यक्तियों को दोषी पाया गया है। वन भूमि को खाली करने के आदेश भी न्यायालय ने दे दिए हैं।
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वन विभाग ने जुब्बल के कठासु निवासी बंसी लाल, जाचली निवासी धर्म सिंह, खड़ापत्थर के कंवर सिंह व बहादुर सिंह के खिलाफ वन भूमि पर अतिक्रमण करने का मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया था। आईपीसी की धारा 447 व वन अधिनियम की धारा 33 के तहत मामला दर्ज किया गया था। न्यायालय के आदेशों के बाद वर्ष 2011-12 में भूमि की निशानदेही करवाई गई, जिसमें मौके पर अतिक्रमण पाया गया है। शुक्रवार को जेएमआईसी प्रथम श्रेणी जुब्बल धीरु ठाकुर की अदालत ने अतिक्रमण के तीनों मामलों में चार व्यक्तियाें को दोषी ठहराया है। तीनों मामले में दस दस बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण कर सेब के बागीचे तैयार किए गए हैं। न्यायालय ने भूमि को खाली कर वन विभाग को सौंपने के आदेश दिए हैं। दोषियों की सजा पर बीस अक्तूबर के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
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इसकी जानकारी मामले की पैरवी कर रहे जिला सहायक न्यायवादी भैरव सिंह नेगी ने दी। उन्हाेंने कहा कि अतिक्रमण के तीन मामलों में चार व्यक्तियों को दोषी पाया गया है। वन भूमि को खाली करने के आदेश भी न्यायालय ने दे दिए हैं।
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