Himachal: हिंदुस्तान-तिब्बत बॉर्डर मार्ग की दुर्दशा पर पीडब्ल्यूडी को फटकार, अधिकारी तलब
हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान-तिब्बत सीमा सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग) की खस्ताहाल स्थिति पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान-तिब्बत सीमा सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग) की खस्ताहाल स्थिति पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य लोक निर्माण विभाग और ठेकेदारों की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह इस विभाग का एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस बन चुका है कि वे बारिश शुरू होने से ठीक पहले काम शुरू करते हैं और बाद में सारी जिम्मेदारी खराब मौसम पर मढ़ देते हैं। पैचवर्क बारिश में टिकने वाला नहीं है। भले ही केंद्र से फंड मिल जाए, लेकिन मानसून के दौरान काम सस्पेंड रहेगा। बारिश से पहले और बरसात के खत्म होने के बाद सितंबर में ही दोबारा काम शुरू किया जाएगा।
हलफनामों में लापरवाह ठेकेदारों को किए गए कुल भुगतान और लगाए गए जुर्माने की स्पष्ट डिटेल नहीं है। जब तक नए टेंडर नहीं हो जाते, पीडब्ल्यूडी सड़क को चलने योग्य स्थिति में रखेगा। अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी, जिसमें संबंधित शीर्ष अधिकारियों को अदालत में पेश होना होगा। विभाग की ओर से हलफनामे में स्वीकार किया गया कि डली से नारकंडा के बीच यह हाईवे बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। यह सड़क शिमला की सेब बेल्ट और किन्नौर की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए लाइफलाइन है। वर्ष 2021 से 2024 के बीच इस सड़क पर टारिंग हुई थी, जो 2023 और 2025 के मानसून में बह गई। गणपति ट्रेडर्स और डीसीसी बिल्डकॉन ने काम में भारी कोताही बरती, जिसके बाद उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर जुर्माना लगाया गया है।
जनहित याचिका में व्यक्तिगत लाभ के लिए शामिल होने की इजाजत नहीं : हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जनहित याचिका में व्यक्तिगत हित रखने वाले पक्षों को कार्यवाही का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से जनहित याचिका का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जेओए (लाइब्रेरियन) के पद पर बैचवाइज नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों से जुड़े मामले में दिया। मामले की सुनवाई के दौरान दो आवेदकों ने सीपीसी के आदेश 1 नियम 10 और धारा 151 के तहत खुद को मामले में पक्षकार बनाने के लिए आवेदन किया था। उनका तर्क था कि इस भर्ती प्रक्रिया में उम्रदराज और पात्र उम्मीदवारों की भर्ती नहीं की जा रही है। इस पर पीठ ने कहा कि जनहित याचिका में व्यक्तिगत हित रखने वाले आवेदकों को कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे जनहित याचिका का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवेदकों को लगता है कि उनके अधिकारों का हनन हुआ है, तो वे कानून के तहत अलग से कानूनी रास्ता अपनाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसी के साथ अदालत ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने नोट किया कि यह जनहित याचिका पहले 15 मई 2023 को निपटा दी गई थी और रिकॉर्ड पर कोई न्यायालय मित्र नहीं था। चूंकि हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव को 31 दिसंबर 2025 को दिए गए अदालती आदेशों के अनुपालन में अभी भी अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है, इसलिए अदालत ने मामले में सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अदालत ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी।