फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Petitions seeking land allotment for project-affected families dismissed in Himachal High Court

HP High Court: परियोजना प्रभावित परिवारों की भूमि आवंटन की मांग वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में खारिज, जानें

Sat, 15 Nov 2025 03:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 15 Nov 2025 03:00 AM IST
सार

एसजेवीएनएल की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना के प्रभावित परिवारों को भूखंड आवंटन की मांग वाली याचिकाओं को हिमाचल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Petitions seeking land allotment for project-affected families dismissed in Himachal High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना के प्रभावित परिवारों को भूखंड आवंटन की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने माना कि जिस पुनः सर्वेक्षण पर याचिकाकर्ता भरोसा कर रहे हैं, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है और सरकार ने भी इस पर कोई कार्यवाही नहीं की है।

विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें एसजेवीएनएल की पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना के तहत भूखंड आवंटित किए जाएं, क्योंकि वर्ष 1990-91 में उनकी जमीन और मकान परियोजना के लिए अधिग्रहीत किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भूमि अधिग्रहण के बाद बनी पुनर्वास योजना में भूमिहीन और आवासहीन परिवारों को भूखंड देने का प्रावधान था। शुरुआत में याचिकाकर्ताओं का नाम प्रभावित परिवारों की सूची में नहीं था, लेकिन वर्ष 2014-15 में हुए पुनः सर्वेक्षण में उनके नाम और उनके पूर्वजों के नाम शामिल किए गए और उन्हें प्रमाणपत्र भी जारी किए गए। उन्होंने तर्क दिया कि समान स्थिति वाले अन्य व्यक्तियों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, लेकिन उनके साथ भेदभाव किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रतिवादी एसजेवीएनएल ने अपने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ताओं के परिवार भूमिहीन परियोजना प्रभावित परिवारों के रूप में पहचाने और प्रमाणित नहीं किए गए थे। निगम ने 2014-15 के पुनः सर्वेक्षण को यह कहते हुए अस्वीकार किया कि वह इस कथित सर्वेक्षण से जुड़ा नहीं था और न ही सरकार द्वारा इसे स्वीकार या अंतिम रूप दिया गया था। निगम ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवजा दिया गया था और चूंकि अधिग्रहण के बाद भी उनके पास अन्य भूमि थी। इसलिए वह योजना के तहत भूमिहीन या आवासहीन परिवारों की परिभाषा में नहीं आते।

विज्ञापन

वहीं, प्रतिवादी राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ताओं को उचित मुआवजा दिया गया था। पुनर्वास योजना के पैरा 3.9 के तहत भूमिहीन परिवार वह है ,जिसकी अधिग्रहण के बाद शेष कृषि भूमि 5 बीघा से कम हो और भवन एवं उससे जुड़ी भूमि खोने वाले व्यक्ति को भूमिहीन परियोजना प्रभावित परिवार नहीं माना जाएगा। स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इन परिभाषाओं के तहत नहीं आते, क्योंकि उनके पास 5 बीघा से अधिक भूमि और मकान थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पुनः सर्वेक्षण हुआ था, लेकिन इसे नीति या दिशानिर्देशों के अनुसार नहीं किया गया था और सरकार से इसकी कोई मंजूरी नहीं मिली थी।

न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी अधिग्रहीत भूमि का उचित मुआवजा दिया गया था और यह विवादित नहीं है। पुनर्वास योजना लागू होने के बाद वर्ष 2019 में याचिकाएं दाखिल होने तक याचिकाकर्ताओं या उनके पूर्वजों द्वारा प्रभावित परिवारों की सूची में शामिल न किए जाने को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। याचिकाकर्ताओं का पूरा मामला बाद के पुनः-सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसे एसजेवीएनएल ने अपनी जानकारी के बिना किया गया माना।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed