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Himachal: एसीएस को एसटीए, परिवहन निदेशक को आरटीए अध्यक्ष के पद से हटाने के आदेश

Thu, 12 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 12 Mar 2026 05:00 AM IST
सार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 29 मई 2023 को जारी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत इन नियुक्तियों को वैध बताया गया था। 

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Orders to remove ACS from the post of STA, Transport Director from the post of RTA Chairman
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) को राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) और परिवहन निदेशक को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अध्यक्ष पद से तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 29 मई 2023 को जारी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत इन नियुक्तियों को वैध बताया गया था। अदालत ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से इन पदों पर काम नहीं करने का आदेश दिया है।

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अदालत ने प्रदेश सरकार को दिए ये आदेश
अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि 31 मार्च तक एसटीए और आरटीए का पुनर्गठन कानून के अनुसार कर पात्र व निष्पक्ष व्यक्तियों को अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाए। नई नियुक्तियों तक प्राधिकरण के अन्य सदस्य केवल रोजमर्रा के जरूरी काम करेंगे, लेकिन वे रूट परमिट देने या नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं रखेंगे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों की ओर से अब तक चेयरमैन के रूप में लिए गए फैसले भी अवैध नहीं माने जाएंगे, ताकि प्रशासनिक अव्यवस्था न फैले।

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हालांकि, उन फैसलों को कानून के दायरे में अन्य आधार पर चुनौती दी जा सकती है। अदालत ने पाया कि ये दोनों अधिकारी हिमाचल पथ परिवहन निगम के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) में पदेन सदस्य हैं। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 68(2) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसका किसी परिवहन उपक्रम (जैसे एचआरटीसी) में वित्तीय हित हो, वह निष्पक्षता के लिए एसटीए या आरटीए का सदस्य या अध्यक्ष नहीं बन सकता। अदालत ने माना कि एचआरटीसी के निदेशक के रूप में इन अधिकारियों का संस्थान के वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही से सीधा संबंध है, जो उन्हें इस पद के लिए अयोग्य बनाता है।

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याचिकाकर्ता आनंद मोदगिल ने 29 मई 2023 की उस सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके तहत परिवहन सचिव को एसटीए और परिवहन निदेशक को प्रदेश के सभी आरटीए का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। चूंकि, एचआरटीसी एक सरकारी उपक्रम है और निजी ऑपरेटरों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, इसलिए इन अफसरों का राज्य परिवहन प्राधिकरण और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण का अध्यक्ष होना कानूनन गलत है।
 

निजी ऑपरेटरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
खंडपीठ ने कहा कि परिवहन प्राधिकरणों को निष्पक्ष होना चाहिए। खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि यदि सरकारी उपक्रम चलाने वाले अधिकारी ही रूट परमिट देने या निजी ऑपरेटरों पर कार्रवाई करने वाली संस्था के अध्यक्ष होंगे, तो पक्षपात की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह निजी ऑपरेटरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

न्यायिक नियुक्तियों और सुविधाओं की फाइलें कैबिनेट में अटकीं
 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक बुनियादी ढांचे और नियुक्तियों में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अगली सुनवाई में अदालत में तलब किया है। संबंधित अधिकारी की ओर से 5 जनवरी को दायर हलफनामे की समीक्षा के बाद अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए यह आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने पाया कि हालांकि रजिस्ट्रार जनरल को 3,54,00,000 रुपये की राशि प्रदान कर दी गई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण निर्णय अभी भी मंत्रिपरिषद के पास लंबित हैं।

लॉ क्लर्क-कम-रिसर्च असिस्टेंट (लॉ इंटर्न) के 20 पद, सिविल जजों के 34 नए न्यायालय और उनके सहायक कर्मचारी,अतिरिक्त जिला जज हमीरपुर, जोगिंदर नगर और नालागढ़ में तीन नए पद, जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के लिए नियमित भर्ती के माध्यम से जजमेंट राइटर का एक पद पर अभी भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जिला न्यायपालिका के लिए 13 वाहनों की मंजूरी का मामला 19 अगस्त 2025 से लंबित पड़ा है। अदालत ने टिप्पणी की कि दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जिम्मेदारियों को केवल एक विभाग से दूसरे विभाग पर टाला जा रहा है।खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 31 मार्च को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

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