भावी पीढ़ी की सोच में बदलाव की जरूरत : राज्यपाल
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करसोग/पांगणा (मंडी)। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि जिम्मेदार नागरिक समाज को सही दिशा में ले जा सकते हैं और यह उनकी जिम्मेवारी होती है कि समाज के उत्थान के लिए शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना योगदान अवश्य दें। रविवार को करसोग उपमंडल के चुराग में रामानंद निर्मला देवी सूद धर्मार्थ न्यास की ओर से आयोजित अंतर विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिता की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में दूरदराज की प्रत्येक पाठशाला में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीयता की भावना का अभाव है।
आधुनिकता को अपनाने के साथ हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों और समृद्ध संस्कृति के संरक्षण को बनाए रखते हुए संपूर्ण विकास को सुनिश्चित बनाना चाहिए। भावी पीढ़ी की सोच में एक नए बदलाव की आवश्यकता है। एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल भौतिक खोज से नहीं होता बल्कि अभिभावकों एवं शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों में देशभक्ति, अनुशासन एवं मानवता के मूल्यों से ही सशक्त राष्ट्र बनता है और विद्यार्थी एक संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनते हैं। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने निर्णय लिया है कि वन विभाग के सहयोग से वे जन्मदिवस एवं विवाह की सालगिरह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधरोपण के लिए विशेष अभियान चलाएंगे।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने राज्यपाल तथा उनकी पत्नी दर्शना देवी का स्वागत किया तथा उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर, न्यायमूर्ति पीएस राणा, न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर एवं न्यायमूर्ति सीबी बरोवालिया, मुख्य संसदीय सचित मनसा राम, निदेशक उच्च शिक्षा दिनकर बुराथोकी, एसडीएम विवेक चौहान आदि मौजूद थे। शिशु वर्ग में भजन नृत्य में राजकीय प्राथमिक पाठशाला चुराग ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उच्च वर्ग भजन नृत्य में एसवीएम ने पहला स्थान प्राप्त किया। भाषण में एसवीएम चुराग ने पहला, समूहगान में मॉडल पब्लिक स्कूल चुराग ने पहला स्थान लिया।