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तेंदुए की खालें बरामद होने पर दो दोषियों को तीन-तीन साल की कैद
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मंडी। तेंदुए की खालें बरामद होने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने दो दोषियों को तीन-तीन साल के साधारण कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर तीन डॉ. पुष्पलता के न्यायालय ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत अपराध साबित होने पर सदर तहसील के इलाका बदार के खलारा निवासी मोती राम और पंडोह निवासी मुनीष कुमार को दोषी करार दिया है।
सहायक लोक अभियोजक शैलजा ठाकुर ने मामले की पैरवी करते हुए 12 गवाहों के माध्यम से आरोपियों पर यह अभियोग साबित किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2012 को सदर थाना पुलिस का दल उपनिरीक्षक सलीम कुरैशी की अगुवाई में सुक्की बाईं में तैनात था।
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इस दौरान दो व्यक्ति आए। पुलिस को देख भागने लगे। संदेह के आधार पर पुलिस ने मोती राम और मुनीष कुमार को काबू कर बोरी की तलाशी ली। इसमें तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं। वन विभाग के रेंज आफिसर की ओर से तेंदुए की खालों की शिनाख्त करने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर अभियोग चलाया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत तेंदुओं को मारने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। इसके चलते अदालत ने दोनों दोषियों को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर तीन डॉ. पुष्पलता के न्यायालय ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत अपराध साबित होने पर सदर तहसील के इलाका बदार के खलारा निवासी मोती राम और पंडोह निवासी मुनीष कुमार को दोषी करार दिया है।
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सहायक लोक अभियोजक शैलजा ठाकुर ने मामले की पैरवी करते हुए 12 गवाहों के माध्यम से आरोपियों पर यह अभियोग साबित किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2012 को सदर थाना पुलिस का दल उपनिरीक्षक सलीम कुरैशी की अगुवाई में सुक्की बाईं में तैनात था।
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इस दौरान दो व्यक्ति आए। पुलिस को देख भागने लगे। संदेह के आधार पर पुलिस ने मोती राम और मुनीष कुमार को काबू कर बोरी की तलाशी ली। इसमें तेंदुए की दो खालें बरामद हुईं। वन विभाग के रेंज आफिसर की ओर से तेंदुए की खालों की शिनाख्त करने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर अभियोग चलाया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत तेंदुओं को मारने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। इसके चलते अदालत ने दोनों दोषियों को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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