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Mandi News: सेरी मंच पर महक रहा पहाड़ी स्वाद, भल्ले-बाबरू के दीवाने हुए लोग

Sat, 13 Dec 2025 06:33 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Sat, 13 Dec 2025 06:33 AM IST
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The hilly flavour resonated on Seri Manch, and people went crazy for Bhalle-Babru.
सेरी मंच मंडी में सजे हाट बाजार में पारंपरिक पकवान तैयार करतीं सुनीता और चित्रा। -संवाद
मंडी। शहर का ऐतिहासिक सेरी मंच अब केवल चुनावी सभाओं या कार्यक्रमों का गवाह नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण की एक नई कहानी का भी केंद्र बन गया है। यहां हर शुक्रवार और शनिवार को लगने वाले हाट बाजार में मंगवाई की दो महिलाएं सुनीता और चित्रा अपने पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।
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लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सुनीता और चित्रा ने होड़ से अलग हटकर कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने शादी-ब्याह और त्योहारों तक सीमित रहने वाले मंडयाली व्यंजनों भल्ले, बाबरू और कचौरी को आम लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया। उनका यह प्रयोग सफल हुआ है। उनके स्टॉल पर घर की बनी पुदीना, धनिया, मूली और इमली की चटनी के साथ परोसे जाने वाले गरमा-गरम पकवानों की भारी मांग है।
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हाट बाजार में इनके अलावा अन्य महिलाएं भी अचार, सीरा, सिड्डू और ऊनी वस्त्र बेचकर स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हैं। महंगाई के दौर में भी इन महिलाओं ने स्वाद के साथ-साथ आम आदमी की जेब का भी ख्याल रखा है। बाबरू 15 रुपये, भल्ले 20 रुपये और कचौरी 40 रुपये में दी जा रही है। इन दो दिनों की कमाई से न केवल उनका घर चल रहा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से मजबूत भी हो रही हैं।
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2014 में शुरू हुआ था सफर
सुनीता बताती हैं कि वर्ष 2014 में उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर समूह बनाया था। शुरुआत ऊनी उत्पादों और छोटे खान-पान व्यवसाय से हुई। सप्ताह के बाकी दिनों में वे अब भी ऊनी स्वेटर और जुराबें बुनने का काम करती हैं, लेकिन सप्ताहांत पर उनका फोकस फूड स्टॉल पर होता है।

शिमला में भी मिली सराहना
शहरी आजीविका मिशन के तहत इन महिलाओं को शिवरात्रि और सरस मेलों में भी स्टॉल लगाने का मौका मिलता है। हाल ही में शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम में उनके द्वारा बनाए गए पारंपरिक व्यंजनों को खूब सराहा गया और वहां के लोगों ने अगली बार और अधिक व्यंजन लाने की मांग की।
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