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Mandi News: माता के मुकुट पर चांदी का छत्र सजते ही शुरू हुआ मेला
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ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच छत्र यात्रा निकाली
माता श्यामा काली क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी
संवाद न्यूज एजेंसी
बलद्वाड़ा (मंडी)। हटली के प्रसिद्ध श्यामा काली मठ बलद्वाड़ा का दो दिवसीय मेला मंगलवार को श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गया। माता के मुकुट पर चांदी का छत्र स्थापित किए जाने के साथ ही मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर कमेटी के प्रधान चुन्नीलाल शर्मा ने बताया कि मेले के दिन जिस पुजारी की बारी होती है, वह अपने घर में मंडी रियासत के राजा श्याम सेन द्वारा माता को भेंट किए गए चांदी के छत्र को विधिवत रूप से सजाता है। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच छत्र यात्रा घर से मंदिर तक निकाली जाती है, जिसमें अन्य पुजारी और श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। मंदिर पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद चांदी के छत्र को माता श्यामा काली के मुकुट पर स्थापित किया जाता है, जिसे मेले के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। माता श्यामा काली क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी और इष्ट देवी हैं। मेले के दौरान श्रद्धालु नई फसल कनक भी माता को अर्पित करते हैं। दो दिन तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिल रही है। भक्त मेले का आनंद लेते हुए माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
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माता श्यामा काली क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी
संवाद न्यूज एजेंसी
बलद्वाड़ा (मंडी)। हटली के प्रसिद्ध श्यामा काली मठ बलद्वाड़ा का दो दिवसीय मेला मंगलवार को श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गया। माता के मुकुट पर चांदी का छत्र स्थापित किए जाने के साथ ही मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर कमेटी के प्रधान चुन्नीलाल शर्मा ने बताया कि मेले के दिन जिस पुजारी की बारी होती है, वह अपने घर में मंडी रियासत के राजा श्याम सेन द्वारा माता को भेंट किए गए चांदी के छत्र को विधिवत रूप से सजाता है। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच छत्र यात्रा घर से मंदिर तक निकाली जाती है, जिसमें अन्य पुजारी और श्रद्धालु भी शामिल होते हैं। मंदिर पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद चांदी के छत्र को माता श्यामा काली के मुकुट पर स्थापित किया जाता है, जिसे मेले के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। माता श्यामा काली क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी और इष्ट देवी हैं। मेले के दौरान श्रद्धालु नई फसल कनक भी माता को अर्पित करते हैं। दो दिन तक चलने वाले इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिल रही है। भक्त मेले का आनंद लेते हुए माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।