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Mandi News: आपदा ने सब छीन लिया, अब बसने की जगह भी नहीं
Fri, 02 Jan 2026 12:22 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:22 AM IST
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बालीचौकी (मंडी)। आपदा के बाद बालीचौकी क्षेत्र के प्रभावित लोगों की जिंदगी अब तक पटरी पर नहीं लौट पाई है। सर्दियों में भी कई परिवार मजबूरी में रिश्तेदारों के यहां या टेंटों में रहने को विवश हैं। सरकार की ओर से आपदा प्रभावितों को घर निर्माण के लिए चार लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि लोगों के पास घर बनाने के लिए सुरक्षित और योग्य जमीन ही नहीं बची है।
बालीचौकी क्षेत्र में इस बार सैकड़ों लोग आपदा के कारण बेघर हो गए। सरकार ने किराये की सहायता, कंबल, तिरपाल और अन्य जरूरी राहत सामग्री के साथ पहली किस्त भी प्रदान की है लेकिन जमीन की उपलब्धता न होने से लोग असहाय महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि घर बनाने के लिए धन तो मिल रहा है, परंतु जमीन के बिना यह सहायता उनके किसी काम की नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश लोगों के पास अपनी मलकियत भूमि है लेकिन आपदा के दौरान यह जमीन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कहीं जमीन में गहरी दरारें पड़ गई हैं तो कहीं भूस्खलन के कारण भूमि पूरी तरह बह गई है। ऐसे में उस जमीन पर दोबारा घर बनाना खतरे से खाली नहीं है। प्रभावित परिवारों के पास इतनी आर्थिक क्षमता भी नहीं है कि वे नई जमीन खरीद सकें।
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आपदा प्रभावितों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से सुरक्षित और स्थायी जमीन की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका पुनर्वास अधूरा ही रहेगा। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी इस सबसे बड़ी समस्या को समझते हुए जल्द ठोस समाधान निकालेगी।
हमारे पास अपनी जमीन है लेकिन जिस स्थान पर घर बना था, उसके नीचे से लगातार पानी निकलने के कारण मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अब उस जगह पर घर बनाना संभव नहीं है। जमीन भी है लेकिन वह नाले के किनारे है, जहां पहले ही भूस्खलन हो चुका है। ऐसे में परिवार के सामने घर कहां बनाया जाए, यह सबसे बड़ी चिंता है।
-तिलक राज, टील
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मलकियत भूमि तो है लेकिन वह घर निर्माण के योग्य नहीं है। हिमाचल और केंद्र सरकार प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर घर बनाने के लिए जमीन आवंटित करे ताकि सम्मानपूर्वक अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।
-तारजू देवी, टील
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गांव में कई घर पूरी तरह टूट चुके हैं और कई बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। घरों के आसपास की जमीन में भी दरारें आ चुकी हैं। लोग अब गांव में दोबारा घर बनाने से डर रहे हैं कि कहीं भविष्य में फिर से ऐसी आपदा न आ जाए।
-कुर्म दत्त, माणी पंचायत
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बालीचौकी क्षेत्र में इस बार सैकड़ों लोग आपदा के कारण बेघर हो गए। सरकार ने किराये की सहायता, कंबल, तिरपाल और अन्य जरूरी राहत सामग्री के साथ पहली किस्त भी प्रदान की है लेकिन जमीन की उपलब्धता न होने से लोग असहाय महसूस कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि घर बनाने के लिए धन तो मिल रहा है, परंतु जमीन के बिना यह सहायता उनके किसी काम की नहीं है।
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ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश लोगों के पास अपनी मलकियत भूमि है लेकिन आपदा के दौरान यह जमीन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कहीं जमीन में गहरी दरारें पड़ गई हैं तो कहीं भूस्खलन के कारण भूमि पूरी तरह बह गई है। ऐसे में उस जमीन पर दोबारा घर बनाना खतरे से खाली नहीं है। प्रभावित परिवारों के पास इतनी आर्थिक क्षमता भी नहीं है कि वे नई जमीन खरीद सकें।
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आपदा प्रभावितों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से सुरक्षित और स्थायी जमीन की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका पुनर्वास अधूरा ही रहेगा। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी इस सबसे बड़ी समस्या को समझते हुए जल्द ठोस समाधान निकालेगी।
हमारे पास अपनी जमीन है लेकिन जिस स्थान पर घर बना था, उसके नीचे से लगातार पानी निकलने के कारण मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अब उस जगह पर घर बनाना संभव नहीं है। जमीन भी है लेकिन वह नाले के किनारे है, जहां पहले ही भूस्खलन हो चुका है। ऐसे में परिवार के सामने घर कहां बनाया जाए, यह सबसे बड़ी चिंता है।
-तिलक राज, टील
मलकियत भूमि तो है लेकिन वह घर निर्माण के योग्य नहीं है। हिमाचल और केंद्र सरकार प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर घर बनाने के लिए जमीन आवंटित करे ताकि सम्मानपूर्वक अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।
-तारजू देवी, टील
गांव में कई घर पूरी तरह टूट चुके हैं और कई बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। घरों के आसपास की जमीन में भी दरारें आ चुकी हैं। लोग अब गांव में दोबारा घर बनाने से डर रहे हैं कि कहीं भविष्य में फिर से ऐसी आपदा न आ जाए।
-कुर्म दत्त, माणी पंचायत