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मंडी के राजबेहड़े में अपनी कोठी में पहुंचे शुकदेव थट्टा
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अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले में भाग लेने के लिए देवलुओं के साथ पहुंचे देव शुकदेव ऋषि थट्टा।
- फोटो : Mandi
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मंडी। महर्षि शुकदेव थट्टा रविवार को अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचे। वह अपनी कोठी राजबेहड़े में 400 देवलुओं के साथ शाम को साढ़े पांच बजे पहुंचे। देवता के शहर के करीब पहुंचते ही छोटी काशी मंडी देव ध्वनियों से गूंज उठी।
वह 400 देवलुओं के साथ 9 दिन तक अपनी कोठी में ठहरेंगे। सोमवार को बड़ादेव कमरुनाग के स्वागत के बाद गुरुद्वारा के पास देवता का माधो राय की छड़ी से स्वागत किया जाएगा। देवता एक मार्च को बाबा भूतनाथ मंदिर में जाने वाली छोटी जलेब में शिरकत करेंगे। देवता के मंडी पहुंचने पर देवलुओं और श्रद्धालुओं के लिए धाम लगाई गई। इसमें देर रात तक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
दोपहर बाद देवता माधो राय के साथ शुकदेव ऋषि का भव्य मिलन होगा। दो मार्च को शुकदेव ऋषि थट्टा भव्य जलेब में शिरकत करेंगे। इसमें देवता का अहम स्थान रहता है। देवता हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में दो दिन पहले पहुंचते हैं। इन्हें राजा अशोक सेन ने राजबेहड़े में अहम स्थान दिया है। 25 वर्षों से उसी स्थान पर विराजमान रहते हैं। दिन के समय देवता पड्डल में प्रस्थान करते हैं। इनका प्राचीन नाम (श्री देव थट्टी मंडघयाल) है।
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संतान प्राप्ति और बारिश के देवता माने जाते हैं महर्षि शुकदेव थट्टा
श्री देव कमरुनाग के बाद राजदरबार मंडी में महर्षि शुकदेव थट्टा का छह नरोल देवियों के बाद तीसरा स्थान माना गया है। श्री शुकदेव ऋषि थट्टा को संतान प्राप्ति और बारिश का देवता माना जाता है। वे अपने भक्तों की मन्नत पूरी करते हैं।
देवता का मंदिर जिला मुख्यालय मंडी से 47 किलोमीटर दूर थट्टा गांव देवरी में स्थित है। महर्षि शुकदेव थट्टा देव के कारदार मोहन लाल ठाकुर ने बताया कि देवता रविवार सुबह 8 बजे अपने मूल स्थान थट्टा से रवाना हुए और 47 किमी का सफर तय कर अपने बेड़े मंडी में 400 देवलुओं के साथ पहुंचे। सोमवार को देवता माधो राय के साथ मिलन होगा
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वह 400 देवलुओं के साथ 9 दिन तक अपनी कोठी में ठहरेंगे। सोमवार को बड़ादेव कमरुनाग के स्वागत के बाद गुरुद्वारा के पास देवता का माधो राय की छड़ी से स्वागत किया जाएगा। देवता एक मार्च को बाबा भूतनाथ मंदिर में जाने वाली छोटी जलेब में शिरकत करेंगे। देवता के मंडी पहुंचने पर देवलुओं और श्रद्धालुओं के लिए धाम लगाई गई। इसमें देर रात तक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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दोपहर बाद देवता माधो राय के साथ शुकदेव ऋषि का भव्य मिलन होगा। दो मार्च को शुकदेव ऋषि थट्टा भव्य जलेब में शिरकत करेंगे। इसमें देवता का अहम स्थान रहता है। देवता हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में दो दिन पहले पहुंचते हैं। इन्हें राजा अशोक सेन ने राजबेहड़े में अहम स्थान दिया है। 25 वर्षों से उसी स्थान पर विराजमान रहते हैं। दिन के समय देवता पड्डल में प्रस्थान करते हैं। इनका प्राचीन नाम (श्री देव थट्टी मंडघयाल) है।
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संतान प्राप्ति और बारिश के देवता माने जाते हैं महर्षि शुकदेव थट्टा
श्री देव कमरुनाग के बाद राजदरबार मंडी में महर्षि शुकदेव थट्टा का छह नरोल देवियों के बाद तीसरा स्थान माना गया है। श्री शुकदेव ऋषि थट्टा को संतान प्राप्ति और बारिश का देवता माना जाता है। वे अपने भक्तों की मन्नत पूरी करते हैं।
देवता का मंदिर जिला मुख्यालय मंडी से 47 किलोमीटर दूर थट्टा गांव देवरी में स्थित है। महर्षि शुकदेव थट्टा देव के कारदार मोहन लाल ठाकुर ने बताया कि देवता रविवार सुबह 8 बजे अपने मूल स्थान थट्टा से रवाना हुए और 47 किमी का सफर तय कर अपने बेड़े मंडी में 400 देवलुओं के साथ पहुंचे। सोमवार को देवता माधो राय के साथ मिलन होगा
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