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Mandi News: बड़ा देव कमरूनाग के शहर में आते ही बारिश
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माधोराय से मिलने के आधे घंटे बाद खिली धूप
बारिश की परंपरा रही बरकरार, वाद्ययंत्रों से गूंजी छोटी काशी
लाइव रिपोर्ट
केपी पांजला
मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव को लेकर बड़ादेव कमरूनाग के वीरवार को शहर में पहुंचते ही छाेटी काशी ढोल-नगाड़ों और वाद्ययंत्रों से गूंज उठी। अपने स्थल से 29 फरवरी को देवलुओं संग रवाना हुए बड़ा देव कमरूनाग 90 किलोमीटर के पैदल सफर के बाद वीरवार दोपहर दो बजे पुलघराट पहुंचे। शहर में पहुंचने पर मौसम ने भी करवट ली और आसमान में काली घटा छा गई। मौसम को देख ऐसा लगा मानों शाम हो गई हो।
पुलघराट में सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिवपाल व पदाधिकारियों ने उनका स्वागत पूजा-अर्चना के साथ किया। इस दौरान मौसम भी बारिश वाला बना रहा। करीब पौने तीन बजे बड़ा देव कमरूनाग बजतंरियों के साथ शहर पहुंचे तो हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गई। इसके बावजूद हजारों लोग उनके आगे नतमस्तक हुए। परंपरा के अनुसार बारिश को शहर की शुद्धि के लिए बताया जाता है। तीन बजे बड़ा देव शिवरात्रि महोत्सव के अधिष्ठाता राजदेवता माधोराय के मंदिर पहुंचे। यहां पर मेला कमेटी के अध्यक्ष और उपायुक्त अपूर्व देवगन समेत अन्य ने स्वागत कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बड़ादेव कमरूनाग और माधोराय की मिलनी करवाई गई। इसे देखने के लिए बारिश के बीच लोगों के बीच भीड़ उमड़ी रही। इसके बाद देव कमरूनाग देवलुओं संग राजमहल भवानी पैलेस पहुंचे जहां राजा ओमेश्वर सेन ने राजपरिवार के सदस्यों ने देव कमरूनाग का स्वागत किया। बड़ा देव के राजदेवता माधोराय से मिलने के बाद करीब पौने चार बजे बारिश रुक गई और फिर से धूप खिल उठी। इस दौरान उनके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोगों का चौराहों पर तांता लगा रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपने फोन में बड़ा देव की तस्वीरों को कैद करते नजर आए।
साढ़े तीन बजे बूढ़ा बिंगल देवता भी पहुंचे
मंडी नगर के आराध्य देवता बाबा भूतनाथ का अवतार माने जाने वाले देवता बूढ़ा बिंगल भी ढोल-नगाड़ों और देवलुओं संग दोपहर बाद तीन बजे चौहाटा बाजार पहुंचे। इस दौरान पूरा चौहाटा बाजार देवलुओं से भर गया और वाद्ययंत्रों और ढोल-नगाड़ों की धुनों से गूंज उठा। इसके बाद देवता बूढ़ा बिंगल ने राजदेवता के दरबार में देवलुओं संग हाजिरी भरी और माधोराय से मिले।
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परंपरा निभाने के लिए बच्चों में भी दिखा उत्साह
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की परंपरा को निभाने के लिए छोटे बच्चों में भी उत्साह दिखा। जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर रुंझ से बूढ़ा बिंगल देवता के साथ पहुंचे देवलुओं और बजंतरियों में छोटे बच्चे भी देखे गए। रुंझ से पहुंचे छठी के अंशु ने बताया कि उसने पिछले साल रणसिंघा बजाना सीखा था। बेशक रणसिंघा अंशु के बराबर था, लेकिन वह उसे बेहद शानदार तरीके से बजा रहा था।
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बारिश की परंपरा रही बरकरार, वाद्ययंत्रों से गूंजी छोटी काशी
लाइव रिपोर्ट
केपी पांजला
मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव को लेकर बड़ादेव कमरूनाग के वीरवार को शहर में पहुंचते ही छाेटी काशी ढोल-नगाड़ों और वाद्ययंत्रों से गूंज उठी। अपने स्थल से 29 फरवरी को देवलुओं संग रवाना हुए बड़ा देव कमरूनाग 90 किलोमीटर के पैदल सफर के बाद वीरवार दोपहर दो बजे पुलघराट पहुंचे। शहर में पहुंचने पर मौसम ने भी करवट ली और आसमान में काली घटा छा गई। मौसम को देख ऐसा लगा मानों शाम हो गई हो।
पुलघराट में सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिवपाल व पदाधिकारियों ने उनका स्वागत पूजा-अर्चना के साथ किया। इस दौरान मौसम भी बारिश वाला बना रहा। करीब पौने तीन बजे बड़ा देव कमरूनाग बजतंरियों के साथ शहर पहुंचे तो हल्की-हल्की बारिश शुरू हो गई। इसके बावजूद हजारों लोग उनके आगे नतमस्तक हुए। परंपरा के अनुसार बारिश को शहर की शुद्धि के लिए बताया जाता है। तीन बजे बड़ा देव शिवरात्रि महोत्सव के अधिष्ठाता राजदेवता माधोराय के मंदिर पहुंचे। यहां पर मेला कमेटी के अध्यक्ष और उपायुक्त अपूर्व देवगन समेत अन्य ने स्वागत कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद बड़ादेव कमरूनाग और माधोराय की मिलनी करवाई गई। इसे देखने के लिए बारिश के बीच लोगों के बीच भीड़ उमड़ी रही। इसके बाद देव कमरूनाग देवलुओं संग राजमहल भवानी पैलेस पहुंचे जहां राजा ओमेश्वर सेन ने राजपरिवार के सदस्यों ने देव कमरूनाग का स्वागत किया। बड़ा देव के राजदेवता माधोराय से मिलने के बाद करीब पौने चार बजे बारिश रुक गई और फिर से धूप खिल उठी। इस दौरान उनके दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोगों का चौराहों पर तांता लगा रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अपने फोन में बड़ा देव की तस्वीरों को कैद करते नजर आए।
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साढ़े तीन बजे बूढ़ा बिंगल देवता भी पहुंचे
मंडी नगर के आराध्य देवता बाबा भूतनाथ का अवतार माने जाने वाले देवता बूढ़ा बिंगल भी ढोल-नगाड़ों और देवलुओं संग दोपहर बाद तीन बजे चौहाटा बाजार पहुंचे। इस दौरान पूरा चौहाटा बाजार देवलुओं से भर गया और वाद्ययंत्रों और ढोल-नगाड़ों की धुनों से गूंज उठा। इसके बाद देवता बूढ़ा बिंगल ने राजदेवता के दरबार में देवलुओं संग हाजिरी भरी और माधोराय से मिले।
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परंपरा निभाने के लिए बच्चों में भी दिखा उत्साह
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की परंपरा को निभाने के लिए छोटे बच्चों में भी उत्साह दिखा। जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर रुंझ से बूढ़ा बिंगल देवता के साथ पहुंचे देवलुओं और बजंतरियों में छोटे बच्चे भी देखे गए। रुंझ से पहुंचे छठी के अंशु ने बताया कि उसने पिछले साल रणसिंघा बजाना सीखा था। बेशक रणसिंघा अंशु के बराबर था, लेकिन वह उसे बेहद शानदार तरीके से बजा रहा था।