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Mandi News: श्रम लाइसेंस को लेकर पुल निर्माण के ठेकेदार को नोटिस
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चंबा। चंबा-पठानकोट एनएच-154ए पर भट्टी नाला में प्रस्तावित पुल निर्माण के लिए श्रम लाइसेंस लेने के मामले में श्रम विभाग ने मैसर्स ओम प्रकाश शर्मा एंड संस दौलतपुर चौक ऊना को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच के दौरान एनएचएआई की ओर से संबंधित ठेकेदार के उसके अधीन न होने की बात सामने आई है। वहीं, लोक निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि भट्टी नाला पुल का कार्य अब एनएचएआई के अधीन आ चुका है और ठेकेदार उसके अधीन नहीं है। एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड का मिलान करने पर सामने आई विसंगतियों के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की है। ठेकेदार से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि हिमाचल प्रदेश अनुबंध श्रम नियम 1974 के तहत उसका लाइसेंस आवेदन क्यों न खारिज कर दिया जाए।
कंपनी ने अनुबंध श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत 20 अनुबंध श्रमिकों को काम पर लगाने के लिए 19 अगस्त 2026 को ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें कार्य अवधि एक जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक दर्शाई गई थी। आवेदन में मुख्य नियोक्ता के तौर पर अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग मंडल चंबा को दर्शाया गया था। आवेदन की जांच के दौरान जिला श्रम अधिकारी कार्यालय ने 25 सितंबर को परियोजना निदेशक एनएचएआई, पीआईयू चंबा से पत्राचार किया। इसके बाद पांच अक्तूबर को लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल चंबा कार्यालय का निरीक्षण कर संबंधित रिकॉर्ड जुटाया गया। दोनों विभागों के रिकॉर्ड में अंतर सामने आने पर ठेकेदार से जवाब तलब किया गया। लिहाजा, अब ठेकेदार को 16 अक्तूबर को शाम चार बजे जिला श्रम अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एनएचएआई के अधीन ठेकेदार आता है तो उसे श्रम लाइसेंस केंद्रीय श्रम विभाग की ओर से मिलेगा। यदि लोक निर्माण विभाग के अधीन ठेकेदार आता है तो उसे जिला श्रम कार्यालय की ओर से श्रम लाइसेंस जारी किया जाएगा।
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जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने बताया कि दस्तावेजों की जांच में रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां सामने आने पर नियमानुसार नोटिस जारी किया गया है। आवेदन के समय कार्य लोक निर्माण विभाग के अधीन था।
कंपनी के पार्टनर बृज किशोर ने कहा कि आवेदन के समय पुल का कार्य लोक निर्माण विभाग के अधीन था। अब यह एनएचएआई के अधीन है। नोटिस का नियमानुसार जवाब दिया जाएगा।
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कंपनी ने अनुबंध श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत 20 अनुबंध श्रमिकों को काम पर लगाने के लिए 19 अगस्त 2026 को ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें कार्य अवधि एक जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक दर्शाई गई थी। आवेदन में मुख्य नियोक्ता के तौर पर अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग मंडल चंबा को दर्शाया गया था। आवेदन की जांच के दौरान जिला श्रम अधिकारी कार्यालय ने 25 सितंबर को परियोजना निदेशक एनएचएआई, पीआईयू चंबा से पत्राचार किया। इसके बाद पांच अक्तूबर को लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल चंबा कार्यालय का निरीक्षण कर संबंधित रिकॉर्ड जुटाया गया। दोनों विभागों के रिकॉर्ड में अंतर सामने आने पर ठेकेदार से जवाब तलब किया गया। लिहाजा, अब ठेकेदार को 16 अक्तूबर को शाम चार बजे जिला श्रम अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
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एनएचएआई के अधीन ठेकेदार आता है तो उसे श्रम लाइसेंस केंद्रीय श्रम विभाग की ओर से मिलेगा। यदि लोक निर्माण विभाग के अधीन ठेकेदार आता है तो उसे जिला श्रम कार्यालय की ओर से श्रम लाइसेंस जारी किया जाएगा।
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जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने बताया कि दस्तावेजों की जांच में रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां सामने आने पर नियमानुसार नोटिस जारी किया गया है। आवेदन के समय कार्य लोक निर्माण विभाग के अधीन था।
कंपनी के पार्टनर बृज किशोर ने कहा कि आवेदन के समय पुल का कार्य लोक निर्माण विभाग के अधीन था। अब यह एनएचएआई के अधीन है। नोटिस का नियमानुसार जवाब दिया जाएगा।