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प्राकृतिक खेती तकनीक ही नहीं, जीवनशैली का विज्ञान : अतुल
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सुंदरनगर में प्राकृतिक खेती पर दो दिवसीय मंडल स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करते पद्म श्री नेकराम
सुंदरनगर (मंडी)। राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा है कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन की तकनीक नहीं, बल्कि जीवनशैली का विज्ञान है। यह मिट्टी, किसान और उपभोक्ता तीनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करती है।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सुंदरनगर राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय के सभागार में दो दिवसीय मंडल स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसका आयोजन कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) मंडी की ओर से किया गया है। इस कार्यशाला में मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति जिलों के कुल 405 किसान भाग ले रहे हैं।
डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को सुदृढ़ करना और किसानों को टिकाऊ, लाभकारी तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों की दिशा में प्रेरित करना है। सीड विलेज (बीज ग्राम) की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्थानीय बीजों का संरक्षण और आत्मनिर्भरता भविष्य की टिकाऊ खेती की नींव है। इस मौके पर विशेष अतिथि एवं पद्मश्री नेक राम शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती का सार जल, जंगल, जमीन और देसी गाय की रक्षा में निहित है। यही चारों तत्व हिमाचल प्रदेश की समृद्ध और स्थायी कृषि व्यवस्था के मूल आधार हैं।
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ऐसे होगा नेचुरल फार्मिंग सर्टिफिकेशन
कार्यशाला के पहले दिन शुक्रवार को तकनीकी सत्रों में दिल्ली से आई मनीषा त्रिपाठी ने नेचुरल फार्मिंग सर्टिफिकेशन सिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने ऑपरेशनल गाइडलाइन एंड वे फारवर्ड विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि यह प्रणाली प्राकृतिक खेती उत्पादों को प्रमाणित करने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के विश्वास को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी। जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्नास्त्र जैसे जैविक घोलों की तैयारी, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन अवसरों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए।
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हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सुंदरनगर राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय के सभागार में दो दिवसीय मंडल स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इसका आयोजन कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) मंडी की ओर से किया गया है। इस कार्यशाला में मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति जिलों के कुल 405 किसान भाग ले रहे हैं।
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डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को सुदृढ़ करना और किसानों को टिकाऊ, लाभकारी तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों की दिशा में प्रेरित करना है। सीड विलेज (बीज ग्राम) की अवधारणा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्थानीय बीजों का संरक्षण और आत्मनिर्भरता भविष्य की टिकाऊ खेती की नींव है। इस मौके पर विशेष अतिथि एवं पद्मश्री नेक राम शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक खेती का सार जल, जंगल, जमीन और देसी गाय की रक्षा में निहित है। यही चारों तत्व हिमाचल प्रदेश की समृद्ध और स्थायी कृषि व्यवस्था के मूल आधार हैं।
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ऐसे होगा नेचुरल फार्मिंग सर्टिफिकेशन
कार्यशाला के पहले दिन शुक्रवार को तकनीकी सत्रों में दिल्ली से आई मनीषा त्रिपाठी ने नेचुरल फार्मिंग सर्टिफिकेशन सिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने ऑपरेशनल गाइडलाइन एंड वे फारवर्ड विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि यह प्रणाली प्राकृतिक खेती उत्पादों को प्रमाणित करने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के विश्वास को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी। जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्नास्त्र जैसे जैविक घोलों की तैयारी, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक उत्पादों के विपणन अवसरों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए।