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Mandi News: बिना बारिश मक्की को लगा झुलसा रोग, किसानों की बढ़ी चिंता
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मक्की की फसल को लगे झुलसा रोग को दिखाती किसान
पधर क्षेत्र में तेजी से फैल रहा संक्रमण
कृषि विभाग ने कोराजन कीटनाशक के छिड़काव की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। उपमंडल में बिना बारिश मक्की की फसल पर झुलसा रोग और फॉल वर्मी आर्म का हमला बढ़ने लगा है। खेतों में खड़ी मक्की की फसल तेजी से प्रभावित हो रही है। इससे किसानों की अच्छी पैदावार की उम्मीदों को झटका लगा है।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार मक्की के पौधों की वृद्धि के साथ ही पत्तियां झुलसने लगी हैं और पौधों का ऊपरी हिस्सा सूख रहा है। कई खेतों में तना भेदक कीट अंदर ही अंदर पौधों को नुकसान पहुंचा रहा है। निंदाई-गुड़ाई के दौरान भी किसानों को रोगग्रस्त पौधों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है। कुछ किसानों ने कीटनाशक का छिड़काव भी किया लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली।
किसान हरीश कुमार, अनिल कुमार, प्रेम सिंह, राजू, रोशन ठाकुर, सुभाष चंद, मनी राम और रेवत सिंह ने बताया कि इस बार सूखे जैसे हालात से फसल पहले ही कमजोर है। वहीं, अब रोग और कीट का प्रकोप नुकसान को और बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो मक्की की उपज के साथ-साथ हरे चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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कृषि विषय विशेषज्ञ पधर डॉ. दुनी चंद ने बताया कि लंबे समय से शुष्क मौसम रहने के कारण मक्की सहित धान, उड़द, राजमाह की फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ा है। किसानों को प्रभावित खेतों में कोराजन कीटनाशक का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।
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कृषि विभाग ने कोराजन कीटनाशक के छिड़काव की दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। उपमंडल में बिना बारिश मक्की की फसल पर झुलसा रोग और फॉल वर्मी आर्म का हमला बढ़ने लगा है। खेतों में खड़ी मक्की की फसल तेजी से प्रभावित हो रही है। इससे किसानों की अच्छी पैदावार की उम्मीदों को झटका लगा है।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार मक्की के पौधों की वृद्धि के साथ ही पत्तियां झुलसने लगी हैं और पौधों का ऊपरी हिस्सा सूख रहा है। कई खेतों में तना भेदक कीट अंदर ही अंदर पौधों को नुकसान पहुंचा रहा है। निंदाई-गुड़ाई के दौरान भी किसानों को रोगग्रस्त पौधों की संख्या लगातार बढ़ती नजर आ रही है। कुछ किसानों ने कीटनाशक का छिड़काव भी किया लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली।
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किसान हरीश कुमार, अनिल कुमार, प्रेम सिंह, राजू, रोशन ठाकुर, सुभाष चंद, मनी राम और रेवत सिंह ने बताया कि इस बार सूखे जैसे हालात से फसल पहले ही कमजोर है। वहीं, अब रोग और कीट का प्रकोप नुकसान को और बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो मक्की की उपज के साथ-साथ हरे चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है।
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कृषि विषय विशेषज्ञ पधर डॉ. दुनी चंद ने बताया कि लंबे समय से शुष्क मौसम रहने के कारण मक्की सहित धान, उड़द, राजमाह की फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ा है। किसानों को प्रभावित खेतों में कोराजन कीटनाशक का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है।