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Mandi News: ओलावृष्टि की मार से काफल की कम हुई पैदावार
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शूगर और ब्लड प्रेशर के लिए रामवाण है काफल, दाम चार सौ से पार
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। हिमाचल की हरी भरी वादियों में पैदा होने वाले प्राकृतिक फल काफल की इस बार पैदावार कम से इसके दामों में भी भारी उछाल आ गया है। मंडी जिले में इस फल की बिक्री पांच सौ रुपये तक हो रही है, जबकि जोगिंद्रनगर में इसके दाम चार सौ रुपये से पार पहुंच गए हैं।
मई माह में तैयार हो चुके काफल की कम पैदावार का कारण अप्रैल माह में हुई ओलावृष्टि माना जा रहा है और बाजार में इसकी कम पैदावार पहुंचने से इसके दामों में भी उछाल आ गया है। जोगिंद्रनगर में बीते 6 सालों से काफल का कारोबार करने वाले कारोबारी धनी राम ने बताया कि वे मई और जून माह में करीब 30 क्विंटल से अधिक काफल का कारोबार करते थे, लेकिन इस बार उन्हें अभी तक 80 किलो की खेप ही पहुंच पाई है। बताया कि द्रंग हलके की चौहारघाटी के सुधार गांव और घटासनी के जंगलों में भी इसकी पैदावार कम हुई है और मंडी जिले के गोहर ब्लॉक के मौवीसेरी से उन्हें काफल पिछले साल की तुलना में इस बार महंगे दाम में मिले हैं। इसलिए इसके दामों में भी उछाल आया है। पहाड़ी क्षेत्रों के इस प्राकृतिक फल की पैदावार तुंगल घाटी और कटौला में भी कम होने से बाजारों में इसके दाम ज्यादा हैं है। जोगिंद्रनगर शहर की अन्य दुकानों की बात करें तो यहां पर भी मांगानुसार आपूर्ति न होने से इसके दामों में उछाल आया है। इस कारण इसकी खरीदारी को लेकर भी ग्राहकों में परेशानियां बढ़ी हैं। गर्मी के मौसम में मंडी जिले की चौहारघाटी और तुंगल घाटी में पैदा होने वाला प्राकृतिक फल काफल गर्मी में शरीर में ठंडक प्रदान करता है। मधुमेह और ब्लड प्रेशर के लिए भी यह फल रामवाण साबित होता है। लाल और काले रंग के इस फल की ताशीर ठंडी होने से पेट की बीमारियों से छुटकारा और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी इससे बढ़ती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नीलम ने बताया कि प्राकृतिक फल काफल में कई औषधीय गुण मौजूद हैं। इसका सही सेवन शरीर के लिए लाभदायक साबित होता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। हिमाचल की हरी भरी वादियों में पैदा होने वाले प्राकृतिक फल काफल की इस बार पैदावार कम से इसके दामों में भी भारी उछाल आ गया है। मंडी जिले में इस फल की बिक्री पांच सौ रुपये तक हो रही है, जबकि जोगिंद्रनगर में इसके दाम चार सौ रुपये से पार पहुंच गए हैं।
मई माह में तैयार हो चुके काफल की कम पैदावार का कारण अप्रैल माह में हुई ओलावृष्टि माना जा रहा है और बाजार में इसकी कम पैदावार पहुंचने से इसके दामों में भी उछाल आ गया है। जोगिंद्रनगर में बीते 6 सालों से काफल का कारोबार करने वाले कारोबारी धनी राम ने बताया कि वे मई और जून माह में करीब 30 क्विंटल से अधिक काफल का कारोबार करते थे, लेकिन इस बार उन्हें अभी तक 80 किलो की खेप ही पहुंच पाई है। बताया कि द्रंग हलके की चौहारघाटी के सुधार गांव और घटासनी के जंगलों में भी इसकी पैदावार कम हुई है और मंडी जिले के गोहर ब्लॉक के मौवीसेरी से उन्हें काफल पिछले साल की तुलना में इस बार महंगे दाम में मिले हैं। इसलिए इसके दामों में भी उछाल आया है। पहाड़ी क्षेत्रों के इस प्राकृतिक फल की पैदावार तुंगल घाटी और कटौला में भी कम होने से बाजारों में इसके दाम ज्यादा हैं है। जोगिंद्रनगर शहर की अन्य दुकानों की बात करें तो यहां पर भी मांगानुसार आपूर्ति न होने से इसके दामों में उछाल आया है। इस कारण इसकी खरीदारी को लेकर भी ग्राहकों में परेशानियां बढ़ी हैं। गर्मी के मौसम में मंडी जिले की चौहारघाटी और तुंगल घाटी में पैदा होने वाला प्राकृतिक फल काफल गर्मी में शरीर में ठंडक प्रदान करता है। मधुमेह और ब्लड प्रेशर के लिए भी यह फल रामवाण साबित होता है। लाल और काले रंग के इस फल की ताशीर ठंडी होने से पेट की बीमारियों से छुटकारा और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी इससे बढ़ती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नीलम ने बताया कि प्राकृतिक फल काफल में कई औषधीय गुण मौजूद हैं। इसका सही सेवन शरीर के लिए लाभदायक साबित होता है।
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