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चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को खेल कार्यक्रमों में बाध्य करना अनुचित : रजत
Wed, 16 Oct 2024 08:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 16 Oct 2024 08:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय अंडर-14 खेलकूद प्रतियोगिता को लेकर कुछ मुद्दों पर भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रजत ठाकुर ने विरोध जताया है। रजत का कहना है कि कक्षा चौथी और पांचवीं के विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाध्य करना अनुचित है, क्योंकि यह उनकी आयु और शारीरिक क्षमता के अनुरूप नहीं है।
उन्हें लाने और ले जाने का खर्चा अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शिक्षकों के सिर पर डालना अन्यायपूर्ण है। राज्य सरकार और विशेषकर कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर को इस आयोजन के लिए आवश्यक सभी प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक, मिड-डे मील वर्कर, कुक-कम-हेल्पर और एसएमसी सदस्यों को भी जबरन इस कार्यक्रम में उपस्थित रहने के निर्देश देना गैर लोकतांत्रिक है। इस प्रकार के निर्णय अधिकारी बिना विधायक की जानकारी और सहमति से लें, यह संभव नहीं है। ऐसे निर्णयों से शिक्षकों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो उनके सामान्य कार्यों को बाधित करता है। उन्होंने कांग्रेस विधायक से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और अभिभावकों और शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव न डालने का आग्रह किया है।
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धर्मपुर (मंडी)। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय अंडर-14 खेलकूद प्रतियोगिता को लेकर कुछ मुद्दों पर भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रजत ठाकुर ने विरोध जताया है। रजत का कहना है कि कक्षा चौथी और पांचवीं के विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाध्य करना अनुचित है, क्योंकि यह उनकी आयु और शारीरिक क्षमता के अनुरूप नहीं है।
उन्हें लाने और ले जाने का खर्चा अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शिक्षकों के सिर पर डालना अन्यायपूर्ण है। राज्य सरकार और विशेषकर कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर को इस आयोजन के लिए आवश्यक सभी प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक, मिड-डे मील वर्कर, कुक-कम-हेल्पर और एसएमसी सदस्यों को भी जबरन इस कार्यक्रम में उपस्थित रहने के निर्देश देना गैर लोकतांत्रिक है। इस प्रकार के निर्णय अधिकारी बिना विधायक की जानकारी और सहमति से लें, यह संभव नहीं है। ऐसे निर्णयों से शिक्षकों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो उनके सामान्य कार्यों को बाधित करता है। उन्होंने कांग्रेस विधायक से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और अभिभावकों और शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव न डालने का आग्रह किया है।
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