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Mandi News: बीमा प्रीमियम कट रहा, फसलें तबाह फिर भी क्लेम नहीं
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सराज में चार साल से मौसम की मार झेल रहे किसान-बागवान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदा से फसलें बर्बाद होने के बावजूद सराज क्षेत्र के किसानों-बागवानों को बीमा क्लेम नहीं मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से हर साल फसल बीमा के नाम पर हजारों रुपये काटे जा रहे हैं लेकिन नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी कार्यालयों और बीमा कंपनियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सराज क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेतीबाड़ी और बागवानी पर निर्भर हैं। पिछले चार वर्षों से मौसम की मार और वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा से सेब, मटर, गेहूं, नाशपाती समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई किसानों ने खेती और बागवानी के लिए बैंकों से लाखों रुपये का केसीसी ऋण लिया है। क्लेम नहीं मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।
स्थानीय बागवान रोशन लाल, कहान सिंह और अन्य किसानों का कहना है कि प्रीमियम नियमित कटने के बावजूद क्लेम नहीं मिल रहा। बीमा कंपनी के एजेंट राजस्व विभाग की सामूहिक रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कहते हैं, जबकि पटवारी नुकसान का रिकॉर्ड रोजनामचा में दर्ज कर तहसीलदार को सूचना देने की बात कहते हैं। तहसीलदार कार्यालय से रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की जानकारी मिलती है। किसानों-बागवानों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर लंबित क्लेम जल्द जारी करने की मांग की है।
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बालीचौकी के तहसीलदार अनुपम अग्निहोत्री ने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट मिलने के बाद उसे आगामी कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाता है। आगे की स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदा से फसलें बर्बाद होने के बावजूद सराज क्षेत्र के किसानों-बागवानों को बीमा क्लेम नहीं मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से हर साल फसल बीमा के नाम पर हजारों रुपये काटे जा रहे हैं लेकिन नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी कार्यालयों और बीमा कंपनियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सराज क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेतीबाड़ी और बागवानी पर निर्भर हैं। पिछले चार वर्षों से मौसम की मार और वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा से सेब, मटर, गेहूं, नाशपाती समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई किसानों ने खेती और बागवानी के लिए बैंकों से लाखों रुपये का केसीसी ऋण लिया है। क्लेम नहीं मिलने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।
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स्थानीय बागवान रोशन लाल, कहान सिंह और अन्य किसानों का कहना है कि प्रीमियम नियमित कटने के बावजूद क्लेम नहीं मिल रहा। बीमा कंपनी के एजेंट राजस्व विभाग की सामूहिक रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कहते हैं, जबकि पटवारी नुकसान का रिकॉर्ड रोजनामचा में दर्ज कर तहसीलदार को सूचना देने की बात कहते हैं। तहसीलदार कार्यालय से रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की जानकारी मिलती है। किसानों-बागवानों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर लंबित क्लेम जल्द जारी करने की मांग की है।
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बालीचौकी के तहसीलदार अनुपम अग्निहोत्री ने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट मिलने के बाद उसे आगामी कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाता है। आगे की स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं।